सेक्सॉल्व: ‘मेरे पिता मेरी मां से जबरदस्ती करते थे’
‘मैंने अपने पिता को हमेशा मां से जबरदस्ती करते देखा है.’
‘मैंने अपने पिता को हमेशा मां से जबरदस्ती करते देखा है.’(फोटो: iStock)

सेक्सॉल्व: ‘मेरे पिता मेरी मां से जबरदस्ती करते थे’

सेक्सॉल्व समता के अधिकार के पैरोकार हरीश अय्यर का ‘फिट’ पर सवाल-जवाब आधारित कॉलम है. अगर आपको सेक्स, सेक्स के तौर-तरीके या रिलेशनशिप से जुड़ी कोई परेशानी है, कोई उलझन है, जिसे आप हल नहीं कर पा रहे हैं, या आपको किसी तरह की सलाह की जरूरत है, किसी सवाल का जवाब चाहते हैं या फिर यूं ही चाहते हैं कि कोई आपकी बात सुन ले- तो हरीश अय्यर को लिखिए और वह आपके लिए ‘सेक्सॉल्व’ करने की कोशिश करेंगे. आप sexolve@thequint.com पर मेल कर सकते हैं.

पेश हैं इस हफ्ते के सवाल-जवाबः

'मैंने यही सोचा कि सेक्स जबरदस्ती होता है, मैं इस सोच को कैसे बदलूं?'

प्रिय रेनबोमैन,

मैं अपने पिता और मां को यौन संबंध बनाते देखता बड़ा हुआ हूं. हम एक छोटे से घर में रहते थे, इसलिए मैं चाहकर भी इससे नजर बचा नहीं सकता था. मैंने हमेशा अपनी मां को सेक्स से मना करते और पिता को जबरदस्ती करते देखा है. एक बच्चे के रूप में मैंने सेक्स को इसी तरह परिभाषित किया कि यह जबरदस्ती होता है. अब जबकि मैं अपनी प्रेमिका से शादी की योजना बना रहा हूं, तो उसको लेकर मेरे मन में भी वही फैंटेसी जगह बना रही है, जिसमें उसके साथ जबरदस्ती शामिल है. मैं कुछ अलग सोच पाने में असमर्थ हूं. मुझे क्या करना चाहिए? मुझे खुद को बेहतर बनाने के लिए क्या करना चाहिए?

भला आदमी

प्रिय भले आदमी,

आपके सवाल के जवाब में मैं जो कहने जा रहा हूं, वह किसी भी जेंडर के किसी भी शख्स पर लागू होता है. मेरे साथ अपनी बात साझा करने के लिए शुक्रिया.

बच्चों के रूप में, हम अक्सर अपने माता-पिता का अनुसरण करते हैं. इसके अलावा, युवावस्था में हम जिस तरह से सेक्स और सेक्सुअलटी के संपर्क में आते हैं, कभी-कभी हम अपने पार्टनर्स के बारे में भी उसी तरह महसूस करते हैं या कल्पना करते हैं, इसलिए आप जिस तरीके से सोच रहे हैं, उसमें आपकी कोई गलती नहीं है. मैं वास्तव में इस तथ्य की सराहना करता हूं कि आप खुद हिंसा के बारे में और गैर-सहमति वाले सेक्स के बारे में नहीं सोचना चाहते और खुद को बदलना चाहते हैं. मैं आपको मनोवैज्ञानिक मदद लेने काअनुरोध करता हूं.

सोच के पैटर्न को बदलने के लिए एक विशेषज्ञ की मदद की जरूरत होगी, जो आपके दिमाग को सोचने की नई राह दिखा सके. मैं यह मान कर नहीं चल रहा कि यह एक आसान काम है. इसलिए, बेहतर होगा कि यह जिम्मेदारी एक मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल को सौंप दी जाए.

कृपया जितनी जल्दी हो सके, मनोवैज्ञानिक से मिलें. बाद में भी नियमित रूप से उनसे मिलते रहना याद रखें और पूरे समर्पण और ईमानदारी से सभी निर्देशों का पालन करें.

सप्रेम रेनबोमैन

अंतिम बात: जब हम बेहतर होना चाहते हैं, तो सबकुछ बेहतर हो जाता है. ऐसा सचमुच होता है.

‘मेरा ब्वॉयफ्रेंड मुझ पर शक करता है’

प्रिय रेनबोमैन,

मैं गे हूं और मेरी उम्र 25 साल है. मेरे गे रिलेशनशिप को लेकर समस्या है. मैं पिछले चार साल से किसी से प्यार करता हूं. हम सेक्सुअली भी काफी एक्टिव रहे हैं. हालांकि, चीजें तब बदल गईं जब मेरे पार्टनर, मेरे जीवन के प्यार, ने मेरे गुदा क्षेत्र के पास कुछ फुंसियां देखीं. मैंने उसके साथ कभी दगाबाजी नहीं की है. हालांकि उसने एक बार किया था, लेकिन इस बात को हमने भुला दिया. जब मुझे फुंसियां हो गईं तो उसने मुझे मेरी सेक्सुअल हिस्ट्री के बारे में अजीब-अजीब से सवाल पूछना शुरू कर दिया. जब मैंने उससे कहा कि मैंने उसके अलावा किसी के साथ सेक्स नहीं किया है, यहां तक किसी को किस भी नहीं किया है, तो उसने मुझपर यकीन नहीं किया और सोचा कि फुंसियां किसी प्रकार की एसटीडी बीमारी हैं. मैंने एचपीवी और एचआईवी टेस्ट करा लिया और सभी में रिपोर्ट निगेटिव आई. इसके बाद भी वह बहुत अजीब बर्ताव कर रहा है. हमारी हाल ही में खाने के दौरान बहस हुई और वह मुझ पर चीखा, “तुम एसटीडी का भंडार हो, भगवान जाने तुम मेरी गैरमौजूदगी में किसके साथ सोते हो.” मैं सच में बहुत परेशान हो उठा, लेकिन मैंने एक लफ्ज नहीं कहा. यह बात मुझे अंदर से तोड़ रही है. वह मुझे एक सपोर्ट सिस्टम की तरह लगता था, लेकिन अब मेरे पास कोई नहीं है. मेरा परिवार मुझे सपोर्ट नहीं करता है. मुझे लग रहा है कि मैं मर रहा हूं.

एक आशिक

(फोटो: iStock)

प्रिय आशिक,

मैं अंधे विश्वासों की दुनिया में नहीं रहता. मुझे लगता है कि हर कपल को नियमित रूप से एसटीडी टेस्ट कराना चाहिए. विषमलैंगिक, समलैंगिक, हर एक को. हालांकि, सेक्सुअलटी या किसी भी मामले में अपमान कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे किसी को भी बर्दाश्त करना चाहिए.

इसलिए, मैं आपके पार्टनर के आपको एसटीडी हो जाने के डर और इस वजह से टेस्ट के बारे में सोचने को लेकर नाराज नहीं हूं, बल्कि जिस तरीके से उसने ऐसा किया उसे लेकर नाराज हूं.

सबसे पहली बात सबसे पहले, आपके पार्टनर ने खुद का टेस्ट क्यों नहीं कराया? और आपने इस पर क्यों नहीं जोर दिया? यह भी हो सकता है कि वह संक्रमित हो. मेरा सुझाव है कि आप इस पर जोर दें.

दूसरी बात, कोई भी रिश्ता विश्वास पर कायम रहता है. ऐसा लगता है कि आपका पार्टनर इस सिद्धांत पर चलता है कि वह रिश्ते को अपने अविश्वास के सहारे चला सकता है. आपको उससे साफ-साफ बात करनी चाहिए. आपको उसे बताने की जरूरत है कि अगर वह आप पर लगातार शक करता है, तो आप इसकी सराहना नहीं करेंगे.

रिश्ते को बचाने के लिए खामोश ना रहें. सच बताना चाहिए कि रिश्तों के टूटने के लिए एकमात्र कारण वह खुद है.

आप अकेले नहीं हैं. आपके साथ मैं हूं. आपके साथ हम हैं. मुंबई में एक पूरा समुदाय है. मैं सुझाव दूंगा कि आप द हमसफर ट्रस्ट पर जाएं और उनसे पेशेवर परामर्श लें. यह एक संगठन है, जो सेक्सुअल अल्पसंख्यकों के साथ काम करता है.

आप प्यार करने के काबिल हैं. भरोसा कायम रखें. चीजें बेहतर हो जाती हैं.

रेनबोमैन

अंतिम बात: कुछ लोग इंसानियत के पिछवाड़े की फुंसियां हैं. अपने पार्टनर को बताएं- वह भी उनमें से एक है. एकदम अभी उसे बताएं.

(लोगों की पहचान सुरक्षित रखने के लिए नाम और कुछ ब्योरे बदल दिए गए हैं. आप भी अपने सवाल sexolve@thequint.com पर भेज सकते हैं.)

(हरीश अय्यर एलजीबीटी कम्युनिटी, महिलाओं, बच्चों और जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले समान अधिकार एक्टिविस्ट हैं.)

(FIT अब वाट्स एप पर भी उपलब्ध है. अपने पसंदीदा विषयों पर चुनिंदा स्टोरी पढ़ने के लिए हमारी वाट्स एप सर्विस सब्सक्राइब कीजिए. यहां क्लिक कीजिए और सेंड बटन दबा दीजिए.)

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