क्या बच्चा गोद लेने के नियम-कानून से वाकिफ हैं आप?
एक बच्चा आपके जीवन में बेइंतेहा खुशी लाता है
एक बच्चा आपके जीवन में बेइंतेहा खुशी लाता है(फोटो: iStockphoto)

क्या बच्चा गोद लेने के नियम-कानून से वाकिफ हैं आप?

पेरेंटिंग एक बड़ी जिम्मेदारी है, जो बहुत मेहनत और सब्र मांगती है. लेकिन यह एक तजुर्बा भी है, जो हर कोई हासिल भी करना चाहता है. आखिरकार एक बच्चा आपकी जिंदगी को खुशियों से भर देता है.

आज के दौर में जिंदगी की भागमभाग, नौकरी का तनाव और देर से होने वाली शादियों के कारण पति-पत्नी के लिए गर्भ धारण करने में तमाम मुश्किलें आती हैं. ऐसे में लोग मेडिकल साइंस की मदद लेते हैं. इस तरह के इलाज महंगे, मुश्किल और तनावपूर्ण होते हैं. ऐसे में बच्चा गोद लेना एक बढ़िया विकल्प हो जाता है.

क्या आप बच्चा गोद लेने के लिए योग्य हैं?

बच्चा गोद लेना चाहते हैं, तो धैर्य से सभी प्रक्रियाओं का पालन करें
बच्चा गोद लेना चाहते हैं, तो धैर्य से सभी प्रक्रियाओं का पालन करें
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बच्चा गोद लेना एक सोचा-समझा फैसला होता है, जिसमें ना सिर्फ भावी माता-पिता बल्कि उनके नजदीकी रिश्तेदार भी शामिल होते हैं. इसकी प्रक्रिया लंबी है, जिसके लिए दृढ़ता और धीरज रखना होता है.

गोद लेने वाले माता-पिता का शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्थिर होना जरूरी है. उनके लिए आर्थिक रूप से सक्षम होना जरूरी है. बच्चा गोद लेने के समय उन्हें कोई जानलेवा बीमारी नहीं होनी चाहिए.

गोद लेने से पहले शादीशुदा जोड़े के लिए जरूरी है कि उनकी शादी के कम से कम दो साल हो चुके हों. मतलब उन्होंने स्थाई वैवाहिक संबंधों के कम से कम दो साल पूरे कर लिए हों.
अकेली महिला किसी भी लिंग के बच्चे को गोद ले सकती है
अकेली महिला किसी भी लिंग के बच्चे को गोद ले सकती है
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गोद लेने से पहले माता-पिता दोनों की रजामंदी जरूरी है. यह विकल्प सिर्फ शादीशुदा जोड़ों तक सीमित नहीं है. सिंगल लोग भी, चाहे स्त्री हों या पुरुष, अगर चाहें तो बच्चे गोद ले सकते हैं.

हालांकि एक अकेली महिला लड़का या लड़की गोद ले सकती है, लेकिन अकेला पुरुष किसी बच्ची को गोद नहीं ले सकता है.

गोद लेने वाले माता-पिता किसी भी धर्म के, अनिवासी भारतीय और यहां तक कि भारत के बाहर रहने वाले गैर-भारतीय भी हो सकते हैं. वे सभी जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन), 2015 के तहत एक बच्चे को अपनाने के पात्र हैं.

विकलांग भी अपनी अक्षमता की प्रकृति और सीमा पर विचार करते हुए बच्चा गोद लेने के पात्र हैं. गे या लेस्बियन जोड़े भी गोद ले सकते हैं, लेकिन सिंगल पेरेंट के रूप में, परिवार के रूप में नहीं.

गोद लेने में क्या उम्र भी एक कारक है?

गोद लेने की प्रक्रिया में उम्र का भी ध्यान रखा जाता है
गोद लेने की प्रक्रिया में उम्र का भी ध्यान रखा जाता है
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अगर बच्चे की उम्र चार साल है, तो माता-पिता दोनों की उम्र का जोड़ 90 वर्ष होना चाहिए.

एक शिशु, एक बच्चा या एक बड़ा बच्चा गोद लिया जा सकता है. लेकिन ऐसे में बच्चे की उम्र बढ़ने के साथ ही माता-पिता की उम्र का जोड़ भी बढ़ता जाएगा.
बच्चे और गोद लेने वाले माता-पिता में से प्रत्येक की उम्र में न्यूनतम अंतर 25 साल से कम नहीं होना चाहिए.

अगर बच्चा गोद लेने वाले की उम्र बहुत ज्यादा है, तो शिशु या छोटे बच्चे को पालना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में एजेंसियां एक बड़े बच्चे को गोद लेने का सुझाव दे सकती हैं.

गोद लेने का तरीका

इसकी एक सरल ऑनलाइन प्रक्रिया है, जिसके द्वारा आप बच्चा गोद लेने के इच्छुक आवेदक के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं.

1. रजिस्ट्रेशन और आवेदन

भारत सरकार की सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) केंद्रीय संस्था है, जो सरकारी गाइडलाइंस के मुताबिक बच्चा गोद लेने की सुविधा मुहैया कराती है.

पेरेंट्स को सबसे पहले वेबसाइट (http://carings.nic.in) पर गोद लेने के इच्छुक आवेदक के तौर पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा.

इसके बाद रजिस्ट्रेशन फॉर्म सफलतापूर्वक जमा करने के लिए कई दस्तावेज वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे. सभी दस्तावेज अपलोड कर दिए जाने के बाद आपका आवेदन विचार के लिए तैयार हो जाएगा.

आवेदन स्वीकार किए जाने के लिए वेटिंग टाइम प्रत्येक मामले में अलग होता है. यह एजेंसी की वेटिंग लिस्ट और आपकी मांग से मेल खाने वाले बच्चे की उपलब्धता पर भी निर्भर करता है.

आवेदन का अपडेट नियमित रूप से वेबसाइट पर ट्रैक किया जा सकता है.

2. किन दस्तावेजों की जरूरत होगी

  • पहचान का प्रमाण (मतदाता कार्ड / पैन कार्ड / पासपोर्ट / ड्राइविंग लाइसेंस)
  • माता-पिता के जन्म प्रमाण पत्र
  • निवास का प्रमाण
  • आय का प्रमाण
  • शादी का प्रमाण पत्र
  • पारिवारिक फोटोग्राफ
  • माता-पिता की फिटनेस का प्रमाणपत्र
  • ऐसे दो व्यक्तियों के सिफारिशी पत्र, जो परिवार को अच्छी तरह से जानते हैं (ये करीबी रिश्तेदार न हों)
  • अगर गोद लेने वाला सिंगल पेरेंट है, तो कोई दुर्घटना हो जाने की स्थिति में बच्चे की देखभाल करने के लिए एक रिश्तेदार की सहमति

3. होम स्टडी रिपोर्ट

बच्चा गोद देने की प्रक्रिया में आपका बैकग्राउंड चेक किया जाता है
बच्चा गोद देने की प्रक्रिया में आपका बैकग्राउंड चेक किया जाता है
(फोटो: iStockphoto)

एक बार रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाने के बाद, पेरेंट को संबंधित स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी से संपर्क करके होम स्टडी रिपोर्ट तैयार करानी होती है.

होम स्टडी रिपोर्ट में बच्चा गोद लेने का आवेदन करने वाले माता-पिता की सामाजिक और आर्थिक हैसियत, पारिवारिक पृष्ठभूमि, घर का विवरण, वातावरण और स्वास्थ्य की स्थिति शामिल होती है.

यह काम एक पेशेवर सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा किया जाता है, जो आवदेन करने वाले के घर का दौरा करता है. यह रिपोर्ट जरूरी दस्तावेज जमा करने के 30 दिन के भीतर पूरी कर ली जाती है. एक बार पूरी हो जाने के बाद, ये रिपोर्ट पेरेंट्स को भी दिखाई जाती है. यह तीन साल की अवधि के लिए वैध होती है.

एडॉप्शन की कीमत

<b>निश्चित रूप से इसकी एक कीमत है और आपको इसे दिमाग में रखना चाहिए.&nbsp;</b>
निश्चित रूप से इसकी एक कीमत है और आपको इसे दिमाग में रखना चाहिए. 
(फोटो: iStock)

एडॉप्शन रेगुलेशंस 2017 के अनुसार स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी (SAA) के शुल्क इस प्रकार हैं:

• होम स्टडी रिपोर्ट 6000 रुपये

• चाइल्ड केयर कूपन फीस 40,000 रुपये

• एडॉप्शन के बाद हर दौरे का शुल्क 2,000 रुपये (2 साल में कुल 4 दौरे)

एडॉप्शन के प्रति रुख में बदलाव

बीते दिनों के उलट आज लोगों में ज्यादा खुलापन है और एडॉप्शन को लेकर उनमें स्वीकार्यता बढ़ी है.

बच्चा गोद लेने के ख्वाहिशमंद पेरेंट्स के लिए कई प्री-एडॉप्शन काउंसिलिंग सेशंस उपलब्ध हैं.  

इन सेशन का मकसद पेरेंट को गोद लेने की प्रक्रिया को समझने में मदद करना है और इसमें उन्हें भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक या बच्चों से संबंधित अन्य मुद्दों के समाधान का तरीका सिखाना होता है. कुल मिलाकर, वे लोगों को बेहतर पेरेंट बनने में मदद करते हैं.

काउंसलर पेरेंट्स को गोद लिए बच्चे को शुरू में ही इसके बारे में बता देने की सलाह देते हैं, जिससे कि बड़े होने के बाद बताने पर पैदा होने वाली जटिलताओं से बचा जा सके.

लेकिन ऐसे सेशन ना सिर्फ गोद लेने वाले पेरेंट पर केंद्रित होते हैं, बल्कि इनमें गोद दिए जा रहे बच्चे भी शामिल किए जाते हैं और उन्हें एडॉप्शन की प्रक्रिया के बारे में बताया जाता है.

अगर गोद दिया गया बच्चा, बाद में कभी अपनी जड़ों के बारे में जानना चाहता है, तो स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी या चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी उस समय बहुत उपयोगी साबित होती हैं.

ये एजेंसियां बच्चे को यह जानने में मदद करती हैं कि वह कहां से आया/आई है.

कानूनी तरीके से गोद लें

किसी भी शख्स को कड़ाई से कानूनी एडॉप्शन प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, भले ही यह प्रक्रिया कितनी भी बोझिल क्यों ना लगे. यही इसका सही तरीका है.

सरकारी प्रक्रिया के झंझटों से बचने के लिए, बहुत से पेरेंट दलाल के मार्फत गलत रास्ता अपना कर सीधे नर्सिंग होम से बच्चा गोद लेते हैं. यह भविष्य में बच्चे और पेरेंट दोनों केलिए गंभीर समस्याएं खड़ा कर सकता है.

ऐसे हालात में, गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह कितनी बोझिल दिखती है. इस बेहद संवेदनशील मसले से निपटने का यही सही तरीका है.

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(नूपुर रूपा फ्रीलैंस राइटर हैं. नूपुर पर्यावरण, फूड, इतिहास, पैरेंटिंग और ट्रैवेल पर लेख लिखती हैं.)

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