कहीं आपका बच्चा घबराहट या तनाव का शिकार तो नहीं?
हर बच्चे में शारीरिक और व्यावहारिक लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं. 
हर बच्चे में शारीरिक और व्यावहारिक लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं. (फोटोः iStockphoto)

कहीं आपका बच्चा घबराहट या तनाव का शिकार तो नहीं?

घबराहट ऐसी आम समस्या है, जिसका सामना बच्चों के साथ बड़े भी करते हैं. करीब 20 फीसदी बच्चों में घबराहट या इसके दूसरे लक्षण दिखाई देते हैं. इनमें मामूली डर जैसे जोकर या कुत्तों से डरना या अधिक सामान्य किस्म की घबराहट जैसे हमेशा ये सोचना कि कुछ गलत होने वाला है, शामिल है.

घबराहट की वजह बाहरी या आंतरिक भी हो सकती है. स्कूल में अच्छा करने की चाहत महसूस होना, अपने साथियों के साथ मेल खाना, माता-पिता की लड़ाई या तलाक की बात चलना, शहर या स्कूल में बदलाव, पूरी तरह से व्यस्त दिनचर्या, डरावनी फिल्म या कोई किताब. ये कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनसे बच्चों में घबराहट के साथ ही तनाव बढ़ सकता है.

विशेषज्ञों के अनुसार अब माता-पिता भी पहले से कहीं अधिक तनावग्रस्त रहते हैं. हो सकता है यह दुनिया के आर्थिक या राजनीतिक वातावरण के कारण हो. लेकिन बच्चों पर भी निश्चित रूप से इसका प्रभाव पड़ता है.

चिंतित माता पिता कभी-कभी जरूरत  से ज्यादा नियंत्रण से बच्चों में तनाव का स्तर बढ़ा सकते हैं.

क्या आप अपने बच्चे पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण रखते हैं?

हालांकि ये चिंता जायज है, एक बच्चा यह नहीं समझ सकता है कि वह कहां या किस रास्ते से गुजर रहा है. और वह अपने माता-पिता के अधिक रक्षात्मक व्यवहार को अपनी कमजोरी और अक्षमता के रूप में देख सकता है.

अधिकतर मामलों में बच्चों में डर या घबराहट उम्र के साथ खत्म हो जाती है. एक-दो साल का बच्चा जो किसी अन्य बच्चे के साथ मेलजोल में अलगाव की घबराहट और गंभीर असहजता दर्शाता है. वह हमेशा इस तरह से नहीं रहेगा. हो सकता है वह बड़ी या बड़ा हो कर बहिर्मुखी हो जाए और वो नए लोगों से बात करना और मेलजोल पसंद करने लगे.

लेकिन, जब सौभाग्य से यह सच है, घबराहट के लक्षण को अभी भी इस उम्मीद से नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं कि यह खत्म हो जाएगा. इस पर ध्यान देने की जरूरत है, शायद यह परेशानी के बढ़ने की तुलना में कुछ अधिक गंभीर होने का संकेत हो.

शुरुआत में घबराहट की पहचान नहीं कर पाने का सबसे बड़ा कारण यह है कि घबराहट वास्तव में घबराहट जैसी दिखती ही नहीं है. हर बच्चे में व्यावहारिक और शारीरिक लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं.

एक 12 साल का लड़का आर्यन अपनी घबराहट से प्रभावी रूप से निपटने के लिए आक्रामक व्यवहार का उपयोग कर सकता है. जिससे कि उसके सहपाठी उसके बारे में निर्णय ले सकें. जबकि 5 साल की नायरा स्कूल जाने से पहले शांत हो सकती है.

बच्चों में तनाव और घबराहट के लक्षण

क्या आपका बच्चा बार-बार गुस्से से फट पड़ता है?
क्या आपका बच्चा बार-बार गुस्से से फट पड़ता है?
(फोटोः iStockphoto)

हालांकि व्यवहार या स्वभाव में किसी भी प्रकार का महत्वपूर्ण बदलाव इसकी सबसे अधिक जानकारी देता है.

तनाव या घबराहट से गुजर रहे बच्चों में दिखने वाले कुछ सामान्य लक्षण:

  1. अधिकतर रातें आपके बिस्तर में सिमटा रहे- जबकि पहले उसे अकेले सोने की आदत हो. इस तरह या किसी अन्य तरीके से आपसे चिपका रहे या आप पर निर्भर रहने वाला व्यवहार करे, विशेष रूप से ऐसा व्यवहार जो वह पहले नहीं करता हो. इस बात का संकेत है कि बच्चा घबराहट महसूस कर रहा है.
  2. नई तरह की आदतें विकसित होना, जो घबराहट को दर्शाए, जैसे नाखून काटना या बार-बार हाथ या पैरों को हिलाना.
  3. नींद आने में परेशानी या बेचैन होकर सोना.
  4. ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल
  5. अक्सर सिर दर्द या पेट दर्द की शिकायत करना
  6. बार-बार स्कूल जाने से इनकार करने की जिद
  7. स्कूल से परेशानी की शिकायतें
  8. बार-बार अधिक गुस्सा होना और नखरे दिखाना.

आप क्या कर सकते हैं?

अगर आपको महसूस होता है कि आपका बच्चा उपरोक्त में से कोई भी लक्षण दिखा रहा है, तो यह घबराहट या अधिक तनाव हो सकता है. इस पर कार्रवाई का सबसे बेहतर तरीका है कि आप विशेषज्ञ के पास जाएं.

हो सकता है कि बच्चा बिल्कुल ठीक हो. या हो सकता है कि कुछ शुरुआती समस्या का सामना कर रहा हो. लेकिन सबसे बेहतर है कि इस बारे में बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे विशेषज्ञ की राय ले ली जाए.

जब आपको यह महसूस हो कि बच्चे का तनाव का स्तर सामान्य रूप से लगातार उसके दैनिक जीवन पर पड़ रहा है. तब आपको यह समझ लेना चाहिए कि यह मदद लेने का सही समय है.

मनोविज्ञानी घबराए हुए बच्चे की नकारात्मक सोच को लक्षित तालमेल बिठाने वाली सोच में बदल सकता है. कुछ मामलों में दवाई की भी जरूरत पड़ सकती है.

(प्राची जैन एक साइकोलोजिस्ट, ट्रेनर, ऑप्टिमिस्ट, रीडर और रेड वेल्वेट्स की लवर हैं.)

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