टाइपिंग या राइटिंग? जानिए आपके दिमाग के लिए क्या है बेहतर
जानिए टाइपिंग की बजाए लिखना आपके लिए ज्यादा बेहतर क्यों है.
जानिए टाइपिंग की बजाए लिखना आपके लिए ज्यादा बेहतर क्यों है.(फोटो: iStock)

टाइपिंग या राइटिंग? जानिए आपके दिमाग के लिए क्या है बेहतर

आपको याद है कि आखिरी बार आपने कुछ लिखने के लिए पेन कब उठाया था?

फोन और लैपटॉप पर लगातार काम करने की सूरत में नोटबुक खरीदना, उसे लेकर चलना और फिर उसका यूज करना, ऐसा लगता है कि इसके लिए अधिक मेहनत करनी पड़ेगी. क्या होगा अगर मैं आपको बताऊं कि लिखने की बजाए जो आप टाइपिंग करते हैं, उससे आप अपने दिमाग को उसके लिए जरूरी वर्कआउट से रोक रहे हैं. भले ही टाइपिंग करना पूरी तरह से एक सहज विकल्प हो.

इससे पहले की आप सर्च इंजन पर ‘हैंडराइटिंग और ब्रेन’ टाइप करें, मैं आपको इसके बारे में बता देती हूं.

लिखने के फायदों के बारे में किताबों में काफी कुछ मौजूद है. वास्तव में दुनिया के कुछ हिस्सों में बच्चों के लिए ‘कैसे लिखना है’ सीखने की जरूरत एक चर्चा का विषय बना हुआ है. इसे प्रमुखता से आगे लाने के लिए आक्रामक लॉबिंग के साथ ही आंदोलन चलाए जा रहे हैं.

टाइपिंग की बजाए लिखने की जरूरत क्यों?

लिखना ब्रेन को तेज करता है और टाइपिंग की तुलना में अधिक इंफोर्मेशन को प्रोसेस करता है.
लिखना ब्रेन को तेज करता है और टाइपिंग की तुलना में अधिक इंफोर्मेशन को प्रोसेस करता है.
(फोटो: iStockphoto)

पांच साल के बच्चों के बीच, 2012 की एक स्टडी में पाया गया कि अक्षर बोध के दौरान ब्रेन की सक्रियता हाथ से लिखने और टाइपिंग दोनों ही मामलों में अलग-अलग, लेकिन महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित होती है.

2014 की एक स्टडी में यह सामने आया कि लैपटॉप से नोट्स बनाने से सीखने की क्षमता प्रभावित होती है. ऐसा टाइपिंग के दौरान इंफोर्मेशन के सही तरीके से प्रोसेस नहीं होने के कारण होता है. इसके अलावा वैचारिक प्रश्नों के जवाब देने में हाथ से नोट्स बनाने वाले छात्रों की तुलना में लैपटॉप से नोट्स बनाने वाले छात्रों ने खराब प्रदर्शन किया.

हम दिखाते हैं कि जहां तक अधिक नोट्स बनाना फायदेमंद हो सकता है. वहीं लैपटॉप से नोट्स बनाने वालों में लेक्चर में दी गई जानकारी को बेहतर तरीके से समझने और अपने शब्दों में लिखने की बजाए उसको शब्दशः लिखने की प्रवृत्ति हो जाती है. यह सीखने में सबसे बड़ी बाधा बनती है.
स्टडी
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इसी तरह, 2005 के एक रिसर्च पेपर में, रिसर्चर्स ने बच्चों में टाइपिंग और हाथ से लिखने की तुलना की. उन्होंने देखा कि हाथ से लिखने वाले बड़े बच्चों को अक्षरों को बेहतर तरीके से याद करने में मदद मिली.

लेकिन यह सिर्फ इतना ही नहीं है. फिट इस अच्छी तरह से रिसर्च किए गए मेकेनिज्म को समझने के लिए एक्सपर्ट के पास पहुंचा.

मैक्स हॉस्पिटल में मेंटल हेल्थ डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ समीर मल्होत्रा ने बताया कि लोग जब लिखते हैं तो वे गंभीर रूप से सोचने में सक्षम होते हैं. बच्चा जैसे-जैसे पेंसिल को पकड़ना शुरू करता है, उसमें सीखने की क्षमता बेहतर तरीके से विकसित होती है.

पेन से कागज पर कुछ लिखते हैं तो उससे व्यक्ति की संज्ञानात्मक क्षमता (cognitive abilities) बढ़ती है. इसके साथ ही यह पढ़ने की स्किल्स को भी बढ़ाता है.

टाइपिंग के मुकाबले लिखने में अधिक संज्ञानात्मक कार्य शामिल हैं. जब आप टाइप कर रहे हैं, तो आप अधिक जानकारी को प्रोसेस नहीं कर रहे होते हैं. लेकिन जब आप लिखते हैं, तो आप कुछ समय लेते हैं और उस दौरान जो प्रोसेस होता है वह महत्वपूर्ण है. तो यह इस मायने में बेहतर माना जाता है.
डॉ समीर मल्होत्रा, साइकाइट्रिस्ट

अच्छा होता है हाथ से लिखना

(फोटो: iStockphoto)

एम्स दिल्ली में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ मंजरी त्रिपाठी लिखने की एक्टिविटी के दौरान 'डिफ्यूज ब्रेन एरिया' के बारे में बात करती हैं. इन एरिया के बीच स्विचिंग ब्रेन के लिए एक तरह से एक्सरसाइज है, जो इसे संज्ञानात्मक रूप से लचीला बनाने में मदद करती है.

जब हम लिखते हैं तो उसमें हमारी उंगलियों को हमारे ब्रेन से कई इनपुट मिलते हैं और इसमें हमारे ब्रेन का बड़ा हिस्सा भी शामिल होता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कोर्टेक्स (ब्रेन का हिस्सा) का व्यापक संबंध हाथ से हैं.
डॉ मंजरी त्रिपाठी

इसके अलावा वो कहती हैं कि फोन पर लिखना ब्रेन के डेवलपमेंट के लिए कोई न्यूट्रिशनल वैल्यू नहीं देता है. खासकर इसकी तुलना अगर हाथ से लिखने से की जाए.

फोर्टिस हेल्थकेयर में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और मेंटल हेल्थ डिपार्टमेंट की हेड डॉ कामना छिब्बर बताती हैं कि पर्याप्त रिसर्च से पता चलता है कि लिखना हमारे दिमाग के भीतर न्यूरल पाथवे को मजबूत बनाने का काम करता है. ये न्यूरल पाथवे शब्द की हमारी समझ के लिए जिम्मेदार होते हैं.

उदाहरण के लिए, जब आप अपने हाथ से अल्फाबेट लिख रहे होते हैं, तो आप अल्फाबेट की यादें संजो रहे होते हैं. यही बात शब्द, वाक्य और पैराग्राफ से भी जुड़ी हुई है. आप सोचते हैं, प्रोसेस करते हैं, और जो आप अंततः लिखते हैं उसके अर्थ से खुद को जोड़ते हैं.
डॉ कामना छिब्बर

‘यही कारण है कि, जो बच्चे अभी भी पढ़ना सीख रहे हैं या जो एक लैंग्वेज सीखने की प्रक्रिया में हैं – उनके लिए पढ़ने के साथ-साथ हाथ से लिखना, सबसे अच्छा रिजल्ट देगा.’

इन सभी साक्ष्यों के साथ, हम जानते हैं कि हाथ से लिखने और ब्रेन हेल्थ के बीच एक सीधा संबंध है. तो अगली बार जब आप किसी मीटिंग के लिए जा रहे हों, तो कोशिश करें और अपने बैग में कहीं नोटपैड रखें. बजाए इसके कि आपके हाथ में पहले से मौजूद फोन हो. अपने ब्रेन के लिए ऐसा करें.

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