सही देखभाल की कमी हार्ट पेशेंट के मौत की एक बड़ी वजह: रिपोर्ट
पिछले कुछ साल में 20 और 30 की उम्र तक के लोगों में दिल का दौरा पड़ने के मामलों में पांच गुना बढ़ोतरी हुई है.
पिछले कुछ साल में 20 और 30 की उम्र तक के लोगों में दिल का दौरा पड़ने के मामलों में पांच गुना बढ़ोतरी हुई है.(फोटो:iStock/Altered by FIT)

सही देखभाल की कमी हार्ट पेशेंट के मौत की एक बड़ी वजह: रिपोर्ट

दिल के मरीजों की बेहतर देखभाल नहीं होने के कारण मौत हो जाने से जुड़ी हालिया रिपोर्ट चौंकाने वाली है.

दक्षिण भारत में हार्ट फेलियर के 31 फीसदी मरीजों की मौत बीमारी पता चलने के 1 साल के अंदर हुई. वहीं उचित देखभाल के अभाव में हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के पहले तीन महीनों में ही हार्ट फेलियर के 45 फीसदी मरीजों की मौत हो गई.
रिपोर्ट, त्रिवेंद्रम हार्ट फेलियर रजिस्ट्री (THFR)

इस रिपोर्ट से जाहिर है कि दिल के मरीजों के अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उनकी बेहतर देखभाल की जरूरत है.

भारत में दिल की बीमारी

रिपोर्ट में कहा गया गया कि भारत में दिल की बीमारी एक महामारी बनकर उभर रही है और देश में करीब 80 लाख से 1 करोड़ लोग दिल की बीमारी से पीड़ित हैं.

इंटरनेशनल कंजेस्टिव हार्ट फेलियर (आईएनटीईआर-सीएचएफ) की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत में लोअर और मीडिल क्लास के लोग दिल की बीमारियों के ज्यादा शिकार होते हैं.

हार्ट फेलियर के संबंध में जनजागरुकता का अभाव, बीमारी के लक्षणों को पहचनाने में देरी, जल्दी जांच और इलाज की समझ न होना और भारत में हार्ट फेलियर के इलाज के सीमित विकल्प के कारण मरीजों की असमय मौत हो जाती है.

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हार्ट फेलियर के कारण

कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (CSI) के अध्यक्ष डॉ केवल गोस्वामी कहते हैं, "दिल की मांसपेशियों के कमजोर होने का कोई विशेष कारण नहीं है. पहले दिल का दौरा पड़ना, इस्केमिक हार्ट डिजीज, परिवार में दिल की बीमारियों का आनुवांशिक इतिहास, शराब या नशे का सेवन करने, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थिति हार्ट फेलियर का कारण बन सकती है."

चिंता की बात यह है कि 50 साल से अधिक उम्र के लोग ही इसके लक्षणों को पहचानकर कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करते हैं. सांस लेने में तकलीफ, टखनों, पैर और पेट में सूजन आना व काम के समय थकान महसूस करना इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं.
डॉ केवल गोस्वामी, कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया

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मुंबई के ब्रीच कैंडी हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ देव पहलजानी कहते हैं, "हार्ट फेलियर के अधिकतर मरीजों की उम्र 50 साल से ऊपर होती है. इसमें से कम से कम 40 फीसदी महिला मरीज हैं. डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां और अनियमित जीवनशैली से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है."

हार्ट फेलियर पर सबसे बड़ी क्लीनिकल ग्लोबल स्टडी- PARADIGM-HF के अनुसार, ARNI थेरेपी जैसे आधुनिक इलाज के विकल्पों के साथ जीवन शैली में सुधार से हार्ट फेलियर के मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है. इससे मृत्युदर और अस्पताल में बार-बार भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में 20 फीसदी की कमी आ सकती है.

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