कार्डियक अरेस्ट से 21 साल के क्रिकेटर की मौत, क्या है इसकी वजह?
वार्म-अप सेशन के दौरान एक क्रिकेटर की कार्डियक अरेस्ट से मौत.
वार्म-अप सेशन के दौरान एक क्रिकेटर की कार्डियक अरेस्ट से मौत.(फोटो: iStock)

कार्डियक अरेस्ट से 21 साल के क्रिकेटर की मौत, क्या है इसकी वजह?

इसी मंगलवार, 15 जनवरी को एक 21 साल का क्रिकेटर वार्म-अप के दौरान फील्ड पर गिर पड़ा. उसके साथियों ने तुरंत उसे हॉस्पिटल पहुंचाया. वहां बताया गया कि कार्डियक अरेस्ट की वजह से उसकी मौत हो गई है. अनिकेत शर्मा बाएं हाथ के बल्लेबाज थे, जिन्होंने पिछले साल ही कोलकाता क्रिकेट एकेडमी ज्वॉइन की थी.

आमतौर पर दिल से जुड़ी अचानक होने वाली मौत का संबंध 60 साल या उससे ज्यादा की उम्र के लोगों में देखा जाता है. लेकिन इस मामले में अनिकेत न सिर्फ एक युवा बल्कि एक एथलीट भी थे. एक हेल्दी और फिट शख्स.

दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में कार्डियक सर्जन डॉ मुकेश गोयल के मुताबिक ये मामला जाहिर तौर पर अलग है.

ये समझने के लिए इस मामले क्या हुआ हो सकता है, हम इंसान के दिल की बेसिक फंक्शनिंग पर ध्यान देते हैं.

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट

कार्डियक अरेस्ट से अलग होता है हार्ट अटैक.
कार्डियक अरेस्ट से अलग होता है हार्ट अटैक.
(फोटो: iStock)

डॉ गोयल बताते हैं कि जब हार्ट अटैक पड़ता है, तब हार्ट के इलेक्ट्रिकल और मस्कुलर स्ट्रक्चर सामान्य ढंग से काम नहीं कर रहे होते हैं.

जब दिल का दौरा पड़ता है, तो कोरोनरी धमनियों में से एक में थक्का (क्लॉट) होता है, जिससे उस धमनी से जुड़ी मांसपेशियां डैमेज हो जाती हैं. 
डॉ मुकेश गोयल

हालांकि, ये कार्डियक अरेस्ट से अलग होता है.

अक्सर लोग अचानक हुई मौत को हार्ट अटैक कह देते हैं, जबकि ज्यादातर मामलों में ये कार्डियक अरेस्ट होता है. कार्डियक अरेस्ट, जो वेंट्रिक्यूलर फाइब्रिलेशन की वजह से होता है, के दौरान हार्ट अचानक काम करना बंद कर देता है. धमनियां ठीक रहती हैं. ऐसा क्यों होता है, इसका कोई कारण नहीं है.
डॉ मुकेश गोयल

डॉक्टर को लगता है कि इस युवा एथलीट के साथ भी ऐसा ही हुआ होगा.

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वो 3 हालात, जिसमें फील्ड पर पड़ सकता है हार्ट अटैक

ब्लड के फ्लो में अचानक कमी से नुकसान पहुंचता है.
ब्लड के फ्लो में अचानक कमी से नुकसान पहुंचता है.
(फोटो: iStock)

मैक्स हॉस्पिटल, गुड़गांव में सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ अरविंद दास के मुताबिक एक हार्ट कंडिशन है, जिसे हाइपरट्रॉपिक कार्डियोमायोपैथी, इसमें कोई एथलीट अचानक फील्ड पर गिर सकता है और उसकी मौत हो सकती है.

1. इस कंडिशन में दिल की मांसपेशियों के एक हिस्से का मोटा होना शामिल है, जिससे ब्लड पंप करने में मुश्किल आती है. इस वजह से ब्लड की डिमांड और सप्लाई में बैलेंस नहीं हो पाता.

ये खेल की दुनिया में अचानक गिर पड़ने या साइलेंट डेथ का सबसे आम कारण है. 
डॉ अरविंद दास

इससे बचने के लिए शुरुआती उम्र से ही स्क्रीनिंग जरूरी है.

स्क्रीनिंग पांच साल की उम्र से होने लगती है. ऐसे में अगर किसी बच्चे की पहचान होती है, तो उसे कुछ स्पोर्ट्स नहीं खेलने की जरूरत होती है. इसके अलावा वो नॉर्मल लाइफ जी सकते हैं. 
डॉ अरविंद दास

2. फील्ड पर जानलेवा हार्ट अटैक के दूसरे मामलों में किसी वजह से हार्ट में अचानक ब्लड क्लॉट का बनना है. क्लॉट धमनी में ब्लड को ब्लॉक कर देता है, जिससे हार्ट अटैक पड़ सकता है.

ब्लड के फ्लो में अचानक कमी से नुकसान पहुंचता है, खासकर हेल्दी हार्ट के लिए, जिसके लिए कम ब्लड फ्लो में काम करना नया होता है. अगर दिल पहले से कमजोर है, तो वो उस स्थिति से गुजर चुका होता है.

कभी-कभी बहुत ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी या मेंटल स्ट्रेस से धमनियों को नुकसान पहुंचता है. ये रुकावट उस पर किसी चोट की तरह होता है, जहां ब्लड क्लॉटिंग हो सकती है और ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है.
डॉ अरविंद दास

3. एक और स्थिति है, जब हार्ट में धीरे-धीरे सालों से कोलेस्ट्रॉल जमा हो रहा होता है. ये पांच साल की उम्र से भी शुरू हो सकता है.

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क्या एक्सरसाइज करने से आपको ज्यादा खतरा है?

 कार्डियक अरेस्ट से होने वाली 50 % से ज्यादा मौतों को बेसिक फर्स्ट एड के जरिए रोका जा सकता है.
कार्डियक अरेस्ट से होने वाली 50 % से ज्यादा मौतों को बेसिक फर्स्ट एड के जरिए रोका जा सकता है.
(फोटो: iStock)

डॉ गोयल बताते हैं कि एक्सरसाइज के दौरान कार्डियक अरेस्ट की अधिक आशंका होती है. ये बात सभी उम्र के लोगों पर लागू होती है.

इसे कार चलाने से समझ सकते हैं. स्पीड जितनी ज्यादा होगी, इंजन को उतना ज्यादा ही काम करना पड़ेगा. इसी तरह जब आप एक्सरसाइज कर रहे होते हैं, आपका पल्स रेट बढ़ता है और 130-140 प्रति मिनट तक पहुंच जाता है. हर धड़कन के साथ हार्ट ज्यादा ब्लड की आपूर्ति करता है. ये चीज भी सभी उम्र के लोगों पर लागू होती है. 
डॉ मुकेश गोयल

डॉक्टर आगे बताते हैं कि कार्डियक अरेस्ट से होने वाली 50 % से ज्यादा मौतों को बेसिक फर्स्ट एड के जरिए रोका जा सकता है. इसमें डीफाइब्रिलेटर्स के साथ सीपीआर और मसाज शामिल है.

डॉ गोयल कहते हैं कि इसलिए सभी स्कूलों, ऑफिस, कॉलेज और जिम में बेसिक सीपीआर ट्रेनिंग दिया जाना जरूरी है.

डॉ दास बताते हैं कि फील्ड पर अचानक गिरने के मामले में फर्स्ट एड के तौर पर तुरंत सीपीआर की जरूर होती है. हर मिनट 60-70 बार पंप करने से काफी मदद मिल सकती है, जब तक कि कोई प्रोफेसनल न पहुंचे. हालांकि इस तरह के मामले बेहद कम हो सकते हैं, लेकिन अपनी शरीर की क्षमताओं को धीरे-धीरे बढ़ाने की कोशिश की जानी चाहिए.

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