जन्मजात कटे होंठ और तालु के ये हो सकते हैं रिस्क फैक्टर्स
एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल करीब 35,000 से अधिक बच्चे कटे होंठ और तालु के साथ पैदा होते हैं.
एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल करीब 35,000 से अधिक बच्चे कटे होंठ और तालु के साथ पैदा होते हैं.(फोटो: iStock)

जन्मजात कटे होंठ और तालु के ये हो सकते हैं रिस्क फैक्टर्स

एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल करीब 35,000 से अधिक बच्चे कटे होंठ और तालु के साथ पैदा होते हैं. कटे होंठ और तालु वाले बच्चे गलत जानकारी और अंधविश्वास के कारण न केवल अलग-थलग जीवन जीते हैं, बल्कि उन्हें खाने, सांस लेने और बोलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

रिस्क फैक्टर्स

एम्स की एक स्टडी के मुताबिक प्रेग्नेंसी के शुरुआती कुछ हफ्तों में महिला के स्मोकिंग करने से, धुएं के बीच सांस लेने, जरूरत से ज्यादा दवाइयों के इस्तेमाल, रेडिएशन की चपेट में आने से नवजात के चेहरे में जन्मजात विकृतियां हो सकती हैं. इसमें पोषक तत्वों की कमी भी शामिल है. 

इस स्टडी में कहा गया है कि इन वजहों से नवजात के होंठ कटे हो सकते हैं या तालु में कोई दिक्कत हो सकती है. कटे हुए होठों के कारण बच्चे को बोलने या खाना चबाने में दिक्कत आती है. इससे दांतों की बनावट पर भी असर पड़ता है. जबड़े से तालमेल बिठाने में दिक्कत आती है और चेहरे की आकृति बिगड़ी नजर आती है.

साल 2010 में शुरू की गई स्टडी

एम्स के सेंटर फॉर डेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च (CDER) ने 2010 में इसकी शुरुआत की. इसे तीन स्टेज में पूरा किया जा रहा है.

1. प्री पायलट स्टेज

2. पायलट स्टेज

3. मल्टी सेंट्रिक स्टेज

अभी दिल्ली, हैदराबाद, लखनऊ और गुवाहाटी में मल्टी सेंट्रिक स्टेज चल रहा है. पायलट स्टेज में दिल्ली के एम्स, सफदरजंग हॉस्पिटल और गुड़गांव के मेदांता मेडिसिटी में ये स्टडी हुई.

इसके प्रमुख रिसर्चर और सीडीईआर के प्रमुख डॉ ओपी खरबंदा ने बताया कि इससे जूझ रहे मरीजों को तुरंत इलाज की जरूरत होती है. इसके लिए देखभाल में सुधार की नीति बनाने की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की बीमारियों से बचा जा सके.

(इनपुट- पीटीआई)

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