क्या नॉन-स्टिक और एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना पकाना खतरनाक है?
नॉन-स्टिक कुकवेयर में खाना पकाने के लिए बहुत कम तेल की जरूरत होती है. 
नॉन-स्टिक कुकवेयर में खाना पकाने के लिए बहुत कम तेल की जरूरत होती है. (फोटो: iStock)

क्या नॉन-स्टिक और एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना पकाना खतरनाक है?

एक बार अपने किचन में देखिए, कैसे बर्तन रखे हैं? स्टील, नॉन-स्टिक कुकवेयर, एल्युमिनियम की कढ़ाई या कुकर, शीशे, चीनीमिट्टी के बर्तन. आजकल हर किसी के किचन में नॉन-स्टिक पैन या कढ़ाई, एल्युमिनियम के कुकर जरूर नजर आएंगे. ऐसे में अगर आपसे ये कह दिया जाए कि इन बर्तनों में खाना पकाना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है, तो?

आपने सुना भी होगा कि एल्युमिनियम के बर्तनों में पके खाने से दिमाग को नुकसान, नॉन-स्टिक बर्तनों में खाने बनाने से कैंसर का खतरा. इन बातों से कोई भी डर जाए. लेकिन ये बातें कहां तक सही हैं? आइए ये समझने की कोशिश करते हैं.

कितना सेफ है नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल?

नॉन-स्टिक कुकवेयर की इनर कोटिंग में पॉलीटेट्राफ्लूरोएथिलिन (PTFE) का इस्तेमाल होता है, जिसके कारण इन बर्तनों में कम तेल या घी इस्तेमाल करने पर भी खाना चिपकता नहीं है और इन्हें साफ करना आसान होता है, हालांकि इसी PTFE को कई स्टडीज में सेहत का दुश्मन भी बताया गया है.

पॉलीटेट्राफ्लूरोएथिलिन को आम तौर पर टेफ्लॉन कहा जाता है. इसके निर्माण में PFOA (perfluorooctanoic acid) का इस्तेमाल होता है, जो एक जहरीला प्रदूषक है. इसका संबंध थायरॉइड डिसऑर्डर, क्रोनिक किडनी डिजीज, लिवर डिजीज और भी कई बीमारियों से पाया गया. इस वजह से टेफ्लॉन के निर्माण में PFOA की दूसरे केमिकल जैसे GenX का इस्तेमाल होने लगा. अब कई नॉन-स्टिक बर्तनों के पैक में PFOA-free इसीलिए लिखा नजर आता है. लेकिन दूसरे केमिकल के भी जहरीले होने की आशंका है, जिस पर और रिसर्च होने की जरूरत है.

मैक्स हेल्थकेयर में ग्रैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ अश्विनी सेतिया कहते हैं कि नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल करने की जरूरत ही क्यों है? अगर हम किसी तरह के नुकसान की बात न भी करें, तो आखिर इनमें कोटिंग केमिकल की होती है.

याद करिए कि हमने नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल क्यों शुरू किया था? क्योंकि नॉन-स्टिक कुकवेयर में खाना पकाने के लिए बहुत कम तेल की जरूरत होती है और बिना तेल के पकाए खाना को स्वास्थ्य के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता था. हालांकि अब सभी जानते हैं कि खाने में गुड फैट की जरूरत होती है.

सितंबर 2018 में एक इवेंट को संबोधित करते हुए साठे कॉलेज में लेक्चरर रही रेखा दिवेकर ने बताया कि हमें नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल कब और क्यों नहीं करना चाहिए.

नॉन-स्टिक बर्तनों पर स्क्रैच पड़ने के बाद उनका इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि स्क्रैच से इनर लेयर में मौजूद टेफ्लॉन खाने के जरिए हमारे शरीर, हमारे पाचन तंत्र तक पहुंच जाता है. हमारे शरीर में ऐसा कोई एंजाइम नहीं है, जो टेफ्लॉन को पचा सके और ये स्लो पॉइजन की तरह काम करता है.
प्रो रेखा दिवेकर, एक इवेंट में

नॉन-स्टिक बर्तन यूज कर रहे हैं? इन बातों का रखें ध्यान

इसके अलावा अगर आप नॉन-स्टिक बर्तनों में खाना पका ही रहे हैं, जो कुछ बातों का खास ख्याल रखें:

  • कम तापमान पर खाना पकाएं
  • नॉन-स्टिक पैन्स को पहले से गर्म न करें
  • नॉन-स्टिक बर्तनों में तलने-भुनने का काम न करें
  • नॉन-स्टिक बर्तनों को रगड़ें नहीं
एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इसलिए या तो आप इन बर्तनों का इस्तेमाल न करें या फिर स्क्रैच देखते ही उन्हें फेंक दें.

एल्युमिनियम के बर्तनों पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एल्युमिनियम को लेकर दावा किया गया कि एल्युमिनियम के बर्तन में खाना पकाने के दौरान इसके कण खाने में मिल जाते हैं.

डॉ सेतिया बताते हैं कि ऐसा हो सकता है, खाना पकाने के दौरान ज्यादा तापमान में बर्तन के तत्व कुछ मात्रा में खाने में मिल जाएं. हालांकि एक्सपर्ट स्पष्ट करते हैं कि लो पीएच कुकिंग यानी एसिडिक चीजों से कुकिंग में ऐसा हो सकता है और अधिकतम तय मात्रा से ज्यादा इनटेक हो जाए, तो इससे नुकसान पहुंच सकता है.

हालांकि हम खाने, पानी और दवा के जरिए जो एल्युमिनियम लेते हैं, शरीर में अवशोषित होने से ज्यादा उत्सर्जन तंत्र के जरिए बाहर हो जाता है.

कुछ स्टडीज में अल्जाइमर, पार्किंसन जैसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर और एल्युमिनियम के संबंध का जिक्र है, लेकिन ये पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सका है.

दरअसल एल्युमिनियम या नॉन-स्टिक बर्तनों में खाना पकाने को लेकर ज्यादा स्टडीज या रिसर्च हुए नहीं है और जो स्टडीज हुई हैं, उनमें पुख्ता तौर पर कुछ कहने की बजाए आगे और स्टडीज करने की बात कह दी गई है.

ऐसे में अगर नॉन-स्टिक और एल्युमिनियम के अलावा बर्तनों की बात करें, तो हम स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल कर सकते हैं. लोहे के बर्तन प्रयोग में ला सकते हैं, जिन्हें एक्सपर्ट सुरक्षित बताते हैं.

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