मंकी फीवर के कारण कर्नाटक में हुई 9 लोगों की मौत
मंकी फीवर बंदरों पर रहने वाले परजीवी टिक से फैलता है.
मंकी फीवर बंदरों पर रहने वाले परजीवी टिक से फैलता है.(फोटो: iStock)

मंकी फीवर के कारण कर्नाटक में हुई 9 लोगों की मौत

कर्नाटक के शिमोगा जिले में दिसंबर 2018 के बाद से अब तक मंकी फीवर के कारण नौ लोगों की मौत हो चुकी है.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि जिले में 24 दिसंबर 2018 से लेकर अब तक इस बीमारी के 100 पॉजिटिव मामलों की पहचान हुई है, जिनमें से नौ लोगों की मौत हो गई.

इसके अलावा इस बीमारी से 120 बंदरों की भी मौत हो गई, जिनमें 25 जनवरी को शिमोगा में आठ बंदरों की मौत शामिल है.

एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि अब तक 20,362 लोगों का टीकाकरण किया गया है. उन्होंने कहा, ‘‘हम निगरानी कर रहे हैं और अब तक 374 गांवों का निरीक्षण किया गया है.''

मंकी फीवर बंदरों पर रहने वाले परजीवी टिक से फैलता है.

इंसानों को इसका इंफेक्शन संक्रमित या बीमार बंदर के संपर्क में आने या परजीवी टिक के काटने से हो सकता है.

मंकी फीवर के लक्षण

इसके लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द, बदन दर्द, उल्टी और पेट दर्द शामिल है. डेंगू की तरह ही मंकी फीवर में भी ब्लीडिंग की भी आशंका रहती है.

इलाज

मंकी फीवर का कोई खास इलाज नहीं है, लेकिन समय पर डॉक्टर को दिखाना और सपोर्टिव थेरेपी जरूरी है. इसमें हाइड्रेशन और मरीज में ब्लीडिंग से बचाव शामिल है.

बचाव के लिए क्या करें?

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक क्यासनूर फॉरेस्ट डिजीज से बचाव के लिए वैक्सीन है. इसके अलावा टिक और इससे इंफेक्टेड जानवरों से बचना ही सबसे बेहतर उपाय है.

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(इनपुट: भाषा)

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