मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने का ‘लक्ष्य’, लेबर रूम की गाइडलाइन जारी
सरकार ने लेबर रुम गाइडलाइन लागू करने के लिए की पहल
सरकार ने लेबर रुम गाइडलाइन लागू करने के लिए की पहल(फोटो: क्विंट)

मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने का ‘लक्ष्य’, लेबर रूम की गाइडलाइन जारी

सरकार ने मातृ और नवजात मृत्यु दर घटाने के लिए एक सराहनीय पहल की है. ये पहल हाॅस्पिटल के लेबर रूम (प्रसव कक्ष) के मौजूदा दिशा-निर्देशों को अच्छे ढंग से लागू करने को लेकर की गई है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 11 दिसंबर 2017 को एचडीयू (High Dependency Unit) और आइसीयू (Intensive Care Unit) के लिए दिशा निर्देश रिलीज करने के साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों के लिए एक मोबाइल एप भी लॉन्च किया.

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जारी किया गया ‘लक्ष्य’

‘लक्ष्य’ यानी 'LaQshya' - Labour Room Quality Improvement कार्यक्रम के तहत जारी दिशा-निर्देशों में मां बनने वाली महिला की प्राइवेसी सुनिश्चित करने, डिलीवरी के दौरान आरामदायक स्थिति, और महिला के किसी भी मौखिक या शारीरिक शोषण के लिए नो टाॅलरेंस पाॅलिसी और स्टाफ की ओर से गैरजरूरी भुगतान की मांग नहीं करना शामिल है.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, इस बात के कई उदाहरण सामने हैं जिससे पता चलता है कि शिशुओं के जन्म के समय लेबर रूम में देखभाल की बेहतर सुविधा देना बेहद जरूरी है, ताकि मां और नवजात दोनों के ही जीवन को कोई खतरा न हो.

मंत्रालय के एक अधिकारी ने दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए कहा, प्रसव कक्ष की टीमें अगर दिशा निर्देशों के अनुसार अपने टारगेट को सही समय पर हासिल कर लेती हैं तो उन्हें ईनाम दिया जायेगा.

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