मैमोग्राम के बारे में 5 बातें, जो हर महिला को जाननी चाहिए
शुरूआती दौर में स्तन कैंसर के बारे में पता चलने से कई जानें बच सकती हैं पर महिलाओं को मैमोग्राम से डर लगता है. मैमोग्राम के बारे में भ्रम दूर करने के लिए पूरा रढ़ें. (फोटो: iStock)
शुरूआती दौर में स्तन कैंसर के बारे में पता चलने से कई जानें बच सकती हैं पर महिलाओं को मैमोग्राम से डर लगता है. मैमोग्राम के बारे में भ्रम दूर करने के लिए पूरा रढ़ें. (फोटो: iStock)

मैमोग्राम के बारे में 5 बातें, जो हर महिला को जाननी चाहिए

किसी भी महिला को स्तन कैंसर हो सकता है. जिन महिलाओं को स्तन कैंसर होता है उनमें से 80 प्रतिशत के परिवार में ऐसा कोई इतिहास नहीं होता. इसीलिए डॉक्टर 45 से अधिक उम्र की महिलाओं को दर साल मैमोग्राम कराते रहने की सलाह देते हैं. अगर आपके मन में इससे जु़ड़े कुछ सवाल हैं, तो यहां वो सब कुछ है जो आपको जानना चाहिए.

क्या मैमोग्राम कराने पर दर्द होता है?

मैमोग्राम कराने की प्रक्रिया में 30 मिनट लगते हैं. जिसके दौरान सिर्फ 20 से 30 सेकेंड के लिए स्तनों को दबाया जाता है. अगर आप मेरी तरह हैं और दर्द के कम या ज्यादा होने के हिसाब से आप यह तय करेंगी कि मैमोग्राम कराया जाए या नहीं, तो हो सकता है आप डर जाएं.

पर हम सुंदर दिखने के नाम पर क्या-क्या दर्द नहीं झेलते, तो फिर स्वस्थ रहने के लिए यह दर्द कुछ भी नहीं.

एकदम सच है! (फोटो: iStock)
एकदम सच है! (फोटो: iStock)

अगर दर्द की ही बात करें तो मैमोग्राम के दौरान होने वाला दर्द बिकिनी वैक्स, लिप वैक्स, थ्रेडिंग या बोटोक्स के दर्द से कम ही होता है. तो फिर इस डर से तौबा न करें क्योंकि कैंसर के जल्दी पता लगने से जानें बच सकती हैं.

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आखिर कैसा होता है मैमोग्राम कराना?



(फोटो: iStock)
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स्तनों को इंस्टाग्राम करने से बेहतर है मैमोग्राम कराना.

अगर आप पहली बार करा रहीं है तो जाहिर है आप परेशान होंगी. पर घबराइए मत, यह बस एक तरह का एक्स रे है जिसे देख कर डॉक्टर यह तय करेगा कि आपको स्तन कैंसर है या नहीं.

मैमोग्राम को माहवारी के एक सप्ताह बाद तय करें ताकि आपके स्तन दुख न रहे हों. और इसे दिन के पहले हिस्से में ही रखें क्योंकि मैमोग्राम से पहले आप कोई डियो, परफ्यूम या लोशन नहीं लगा सकतीं. लोशन के कण मैमोग्राम में नजर आ सकते हैं और डॉक्टर को किसी खतरे का शक हो सकता है.

झूठे पॉजिटिव रिजल्ट का मतलब है कैंसर के खतरे का बढ़ जाना

10 से 15 प्रतिशत मैमोग्राफी का रिजल्ट फॉल्स पॉजिटिव आता है, जो कि खतरनाक है. (फोटो: iStock)
10 से 15 प्रतिशत मैमोग्राफी का रिजल्ट फॉल्स पॉजिटिव आता है, जो कि खतरनाक है. (फोटो: iStock)

ऐसा कई बार होता है - रेडियोलॉजिस्ट को कहीं कुछ गड़बड़ दिखाई देती है फिर वह आगे अल्ट्रासाउंड और बायोप्सी कराने को कहते हैं. सब होने के बाद नतीजा आता है कि सब ठीक है.

महिलाओं के लिए यह भावनात्मक और आर्थिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है. लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना ने 1994 से 2009 तक के 15 साल लंबे एक शोध में लाखों मैमोग्राम्स की जांच करने पर पाया है कि मैमोग्राम कराना फायदेमंद है. पर उन महिलाओं में अगले दशक में स्तन कैंसर होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं जिनका नतीजा फॉल्स पॉजिटिव आता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि वह टिशू जिसके कैंसर होने का शक होता है वह शायद तेजी से कोशिकाओं के बढ़ने जैसा कोई जैविक बदलाव होता है जो आगे चल कर कैंसर का कारण बनता है.

अगर नतीजा फॉल्स पॉजिटिव है तो क्या किया जा सकता है

तनाव से तो कोई फायदा नहीं होगा! (फोटो: iStock)
तनाव से तो कोई फायदा नहीं होगा! (फोटो: iStock)

फॉल्स पॉजिटिव नतीजे की वजह से आपका डॉक्टर आपकी जांचें बढ़ा देगा. क्योंकि खतरा ज्यादा है तो आपके परिवार का इतिहास देखते हुए और धूम्रपान संबंधी आदतों व पहले बच्चे के प्रसव का समय नजदीक होने जैसी बातों को ध्यान में रखते हुए आपके लिए जांचों की योजना तैयार की जाएगी जो कि 3 महीने, 6 महीने या 1 साल बाद भी हो सकती है.

और इस बीच स्वास्थ्य वर्धक खाना खाएं और व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें.

आखिरी बात

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के मुताबिक 80 प्रतिशत से ज्यादा ट्यूमर कैंसर नहीं होते और 60 प्रतिशत का पता महिलाएं स्वयं ही लगा लेती हैं.

विशेषज्ञों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि रेडिएशन, खर्चे और तनाव के चलते मैमोग्राम फायदे से ज्यादा नुकसान दे सकते हैं.

पर चाहे आप खुद ही अपने स्तनों की जांच क्यों न करते हों पर 10 में से 4 गांठें इतनी छोटी होती हैं कि खुद जांच करने पर पकड़ में नहीं आतीं. तो अगर आपकी उम्र 45 से ज्यादा है तो अपने डॉक्टर से कैंसर की जांच का सबसे अच्छा तरीका जान लें. और अगर वह आपको मैमोग्राफी की सलाह देता है तो फिर गहरी सांस लें और थोड़ा दर्द झेलने को तैयार हो जाएं.

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