जरूरी है फूड न्यूट्रिशन लेबल पढ़ना, जानिए इसे समझने का सही तरीका
कोई फूड आइटम लेते वक्त उसके न्यूट्रिशन लेबल पर जाता है आपका ध्यान?
कोई फूड आइटम लेते वक्त उसके न्यूट्रिशन लेबल पर जाता है आपका ध्यान?(फोटो: iStockphoto)

जरूरी है फूड न्यूट्रिशन लेबल पढ़ना, जानिए इसे समझने का सही तरीका

हममें से कितने लोग किराने का सामान और दूसरे फूड आइटम्स की खरीदारी करते समय लेबल पर वाकई ध्यान देते हैं? आमतौर पर हम ब्रांड और कीमत को देखते हैं. अगर हमारे पास कुछ अतिरिक्त सेकेंड्स हों, तो ज्यादा से ज्यादा हम एक्सपायरी डेट पर नजर मार लेते हैं. लेकिन न्यूट्रिशन स्टिकर, आमतौर पर अनदेखा ही रह जाता है.

सभी फूड आइटम्स पर न्यूट्रिशन स्टिकर होते हैं, कुछ विस्तार से होते हैं, बाकी में सिर्फ बुनियादी जानकारी होती है, लेकिन हम ज्यादातर उन्हें देखने की जहमत नहीं उठाते. और यहां तक कि अगर हम देखते भी हैं, तो हममें से अधिकांश लोग शब्दों के जाल में भ्रमित होकर रह जाते हैं.

लेकिन हकीकत यह है कि हममें से ज्यादातर लोग इन दिनों डिब्बाबंद और कैन में पैक फूड आइटम्स खरीदते हैं और खाते हैं, इसलिए हमें ‘लेबल की समझ’ होना बेहद जरूरी है- जिससे कि हम ज्यादा आसानी से उत्पादों की तुलना करने में समर्थ हों और उनकी न्यूट्रिशन वैल्यू के मुताबिक बेहतर फूड्स का चुनाव कर सकें. यह खासकर तब और भी उपयोगी है, जब किसी को एक खास डाइट का पालन करना होता है जैसे कि लो-सोडियम फूड्स (हाइपर टेंशन को रोकने के लिए) या हाई फाइबर फूड (कब्ज को ठीक करने के लिए). ठीक से लेबल पढ़ना एक कौशल है, जो एक स्वस्थ जीवन शैली के लिए बहुत फायदेमंद है.

तो आपको क्या देखना चाहिए? स्टिकर पर उन बेहिसाब नामों और संख्याओं का क्या मतलब होता है? यहां एक बुनियादी जानकारी दी गई है.

1. सर्विंग साइज

सर्विंग साइज का मतलब यह नहीं है कि पैकेट कितना भरा है
सर्विंग साइज का मतलब यह नहीं है कि पैकेट कितना भरा है
(फोटो: iStockphoto)

सर्विंग साइज का मतलब यह नहीं है कि पैकेट कितना भरा है. पैकिंग पर बताए गए सर्विंग साइज की हमेशा जांच करें क्योंकि यह आपको बताएगा कि उस चीज की कितनी मात्रा लेनी है, और उस सर्विंग साइज के लिए कैलोरी और दूसरे न्यूट्रिएंट्स की मात्रा का भी पता चलता है.

उदाहरण के लिए अगर बताया गया सर्विंग साइज 2 बिस्किट है, लेकिन आपके पास 4 हैं, तो आपको फौरन हर चीज की गिनती दोगुनी करने की जरूरत है. अधिकांश डिब्बाबंद फूड्स में कई सर्विंग्स होते हैं और अक्सर बताए गए सर्विंग साइज वास्तव में छोटे होते हैं (असल में 3-4 कतरे!), इसलिए आप जितना खा रहे हैं, वह डिब्बे की पीछे की ओर लिखी मात्रा का दोगुना या तिगुना हो सकता है.

2. कैलोरी

अपनी कैलोरी की गणना समझदारी से करें!
अपनी कैलोरी की गणना समझदारी से करें!
(फोटो: iStockphoto)

हम सभी को अपने खाने की मात्रा पर नजर रखने की जरूरत है. आम सिद्धांत है कि वो मात्रा जो हम एक दिन में खाते हैं, उस मात्रा के बराबर या उससे कम होनी चाहिए, जितनी हम बर्न करते हैं. आमतौर पर एक जगह बैठ कर गतिहीन काम करने वाली एक महिला के लिए लगभग 1600 कैलोरी और एक पुरुष के लिए लगभग 2000 कैलोरी की जरूरत होती है. इसलिए इसी हिसाब से अपने लिए गिनती करें.

उदाहरण के लिए अगर आप लज़ानिया (पास्ता की एक किस्म) खाने की सोच रहे हैं, जिसकी एक सर्विंग आपको 1000 कैलोरी से ज्यादा दे रही है, तो शायद आपको दोबारा सोचने की जरूरत है क्योंकि इसे खाने के बाद दिन के बाकी भोजन में अपने कोटे की बची हुई कैलोरी का प्रबंधन करना मुमकिन नहीं होगा.

एक फौरी जांच के लिए, इस सामान्य मानक का पालन करें: 150 कैलोरी या उससे कम के फूड आइटम्स लो-कैलोरी होंगे, 150-400 के बीच मीडियमऔर इससे ऊपर जो भी होगा निश्चित रूप से हाई कैलोरी होगा.

उदाहरण के लिए, अगर आपके पास 2-3 बिस्कुट हैं, तो आपके पास लगभग 100 कैलोरी हैं, लेकिन अगर आप (हम में से कई) 8-10 बिस्कुट खाते हैं, तो यह ज्यादातर कुकीज़ (क्रीम वाले या दूसरे भी) के मामले में 450 कैलोरी से ऊपर हो सकता है.

यह एक जगह बैठ कर गतिहीन काम करने वालों के लिए कैलोरी की दैनिक आवश्यकता का लगभग एक चौथाई या पांचवां हिस्सा है.

सोचिए जरा!

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3. टोटल फैट

पॉलीअनसैचुरेटेड और मोनोअनसैचुरेटेड फैट गुड फैट हैं, लेकिन अधिकांश लेबल में इसका जिक्र नहीं होता है.
पॉलीअनसैचुरेटेड और मोनोअनसैचुरेटेड फैट गुड फैट हैं, लेकिन अधिकांश लेबल में इसका जिक्र नहीं होता है.
(फोटो: iStockphoto)

यहां सबसे पहले आपको टोटल फैट को देखने की जरूरत है, जो जितना हो कम रहे, उतना ही अच्छा है (हम सभी जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा फैट हमारे शरीर के लिए कितने नुकसानदायक हैं). यहां यह भी समझ लें कि 1 ग्राम फैट में 9 कैलोरी होती है. इसलिए, अगर आपके भोजन में 10 ग्राम फैट है, तो इसमें 90 कैलोरी होगी.

बेहतर हो कि फैट से ली जाने वाली कैलोरी को टोटल कैलोरी के 25% से कम पर रखा जाए.

और फिर इन बारीक अक्षरों को पढ़ना फायदेमंद होता है- सैचुरेटेड फैट (दिल के लिए बुरा है, इसलिए उन फूड्स को अपनाएं जिनमें यह कम होता है; सामान्य मानकों के मुताबिक, एक दिन के टोटल फैट की जरूरत के 1/3 से कम सैचुरेटेड फैट लेना सबसे बेहतर है (जो कि टोटल कैलोरी का लगभग 8% है) और ट्रांस फैट (जो कि सबसे खराब है) को शून्य रखना सबसे बेहतर है.

ट्रांस फैट से सावधान रहें: फूड सामग्री की गहराई से पड़ताल करें. अगर आप “हाइड्रोजिनेटेड” या “आंशिक रूप से हाइड्रोजिनेटेड” या “शॉर्टिनिंग” शब्दों का कहीं भी जिक्र देखें, तो आप जो भी फूड ले रहे हैं, उसमें ट्रांस फैट की कुछ मात्रा जरूर होती है... चाहे फूड लेबल ऐसा कहता हो या नहीं.

पॉलीअनसैचुरेटेड और मोनोअनसैचुरेटेड फैट गुड फैट हैं, लेकिन अधिकांश लेबल में इसका जिक्र नहीं होता है.

4. कोलेस्ट्रॉल

यह ट्रांस फैट जितना नुकसानदायक नहीं है, लेकिन इसे कम रखना ही बेहतर है क्योंकि इसकी मात्रा ज्यादा होने पर यह धमनियों को बाधित करता है. हाई कोलेस्ट्रॉल वाले फूड्स में बीफ, अंडा (जर्दी), चीज़, पोल्ट्री और कुछ जंक फूड व पेस्ट्री शामिल हैं.

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5. सोडियम

इसका मतलब नमक से है और आदर्श रूप से यह रोजाना 2400 मिलीग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए. उदाहरण के लिए इंस्टेंट सूप में आमतौर पर नमक बहुत ज्यादा होता है- 100 ग्राम के पैकेट में तकरीबन 5000 मिलीग्राम से ज्यादा. इसलिए अगर आपके एक वक्त में करीब आधा पैकेट (लगभग 25 ग्राम) लेने जा रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप अपनी सोडियम की दैनिक आवश्यकता का आधे से अधिक का उपभोग तुरंत कर लेंगे!

टिप: प्रति सर्विंग 140 मिलीग्राम से कम सोडियम वाले लो-सोडियम फूड्स को अपनाएं.

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6. टोटल कार्बोहाइड्रेट

इसमें आमतौर पर कार्बोहाइड्रेट, डाइटरी फाइबर और शुगर शामिल होते हैं, इसलिए दिए गए ब्रेकअप की जांच ध्यान से करें. अगर फाइबर सामग्री अधिक (3 ग्राम या उससे अधिक प्रति सर्विंग) है, तो फूड में आपके लिए पर्याप्त कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट मौजूद हैं. बहुत कम फाइबर का मतलब रिफाइंड होता है, इसलिए इससे परहेज करना बेहतर है.

7. शुगर

ज्यादातर डिब्बाबंद फूड्स में बहुत ज्यादा शुगर होती ही है.
ज्यादातर डिब्बाबंद फूड्स में बहुत ज्यादा शुगर होती ही है.
(फोटो: iStockphoto)

ज्यादातर डिब्बाबंद फूड्स में बहुत ज्यादा शुगर होती ही है- यह अक्सर सामग्री के वजन का लगभग 1/3 तक होती है. और यह बहुत सारी बेकार (शून्य पोषक तत्व) कैलोरी है.

चूंकि डॉक्टर भी शुगर में कटौती करने की सलाह देते हैं, इसलिए कम शुगर लेना ही बेहतर है.

शब्दावली से सतर्क रहें- अधिकांश जूस के लिए ‘नो एडेड शुगर’ टैग का इस्तेमाल किया जाता है. इसका आमतौर पर यह मतलब है कि फूड में एक सामग्री के रूप में शुगर को नहीं मिलाया गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि फूड में शुगर नहीं है; इसमें प्राकृतिक शुगर हो सकती है (उदाहरण के लिए अगर इसमें दूध है तो लैक्टोज, अगर इसमें फल है तो फ्रक्टोज होगा).

अधिकांश जूसों के 250 ml में लगभग 30 ग्राम से अधिक नैचुरल शुगर होती है.

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8. प्रोटीन

अधिकांश लोगों के लिए प्रोटीन की औसत आवश्यकता 50 से 75 ग्राम के बीच होती है, (कसरत करने वालों के लिए ज्यादा). इसलिए उसी हिसाब से गणना करें. प्रोटीन सप्लीमेंट्स और ऐसे खाद्य पदार्थों से सावधान रहें, जो प्रति सर्विंग बहुत ज्यादा प्रोटीन देते हैं.

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(कविता देवगन दिल्ली में रहने वाली एक न्यूट्रिशनिस्ट, वेट मैनेजमेंट कंसल्टेंट और हेल्थ राइटर हैं. इन्होंने दो किताबें Don’t Diet! 50 Habits of Thin People (Jaico) औरUltimate Grandmother Hacks: 50 Kickass Traditional Habits for a Fitter You (Rupa) लिखी है.)

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