धरती को बचाना चाहते हैं, तो मीट खाना कम कर शाकाहार अपना लें:लांसेट
लांसेट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक तेजी से बढ़ती आबादी के लिए पौष्टिक अनाज का उत्पादन है जरूरी.
लांसेट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक तेजी से बढ़ती आबादी के लिए पौष्टिक अनाज का उत्पादन है जरूरी.(फोटो:iStock)

धरती को बचाना चाहते हैं, तो मीट खाना कम कर शाकाहार अपना लें:लांसेट

हमारे बड़े-बुजुर्ग सही कहते थे. हमारी दाल और सब्जी वाकई में सबसे अच्छी डाइट है. अब इसी बात की पुष्टि एक बड़ी स्टडी ने भी कर दी है.

मेडिकल जर्नल लांसेट में छपी एक नई रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने साल 2050 तक करीब 10 अरब होने वाली दुनिया की आबादी को लंबे समय तक भरपेट पौष्टिक आहार देने का वैश्विक समाधान पेश किया है. वैज्ञानिकों ने खानपान में बदलाव लाने को कहा है, जिससे लोगों की सेहत में सुधार हो.

इसके मुताबिक शक्कर और रेड मीट जैसे हानिकारक चीजों की खपत में कमी लानी होगी और फल, सब्जी, मेवे की खुराक बढ़ानी होगी. 

ऐसी होनी चाहिए डाइट

ये स्टडी करने वाले EAT-Lancet कमीशन ने ‘प्लैनेटरी हेल्थ डाइट’ का सुझाव दिया है, जिससे इंसानों और धरती के स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है.

16 देशों से स्वास्थ्य, पोषण, पर्यावरण, खाद्य प्रणाली, अर्थशास्त्र और राजनीतिक शासन जैसे विषयों के 37 विशेषज्ञों ने मिलकर तीन साल तक इस पर काम किया.

दुनिया भर में भोजन की कमी का मसला

(फोटो: Arnica Kala/फिट)

रिपोर्ट बताती है कि फिलहाल दुनिया में 82 करोड़ लोगों को पर्याप्त खाना नहीं मिलता है और बाकी अनहेल्दी डाइट लेते हैं. 2050 तक जब दुनिया की आबादी करीब दस अरब पहुंच जाएगी, तब दुनिया के सामने लोगों का पेट भरने के साथ पौष्टिक भोजन की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती होगी.

वैज्ञानिकों के अनुसार, ‘प्लैनेटरी हेल्थ डाइट’ अनहेल्दी खाने से जुड़ी बीमारियों जैसे मोटोपा और कुपोषण (अल्पपोषण और अतिपोषण) के वैश्विक बोझ का भी समाधान देती है. 

दुनिया भर में भोजन की कमी के बारे में बात करते हुए इस आयोग के सह-आयुक्त अमेरीका स्थित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के डॉ वाल्टर विलेट ने कहा:

सेहतमंद रहने के लिए, आहार में उचित कैलोरी का होना जरूरी है और इसमें कई तरह की शाकाहारी चीजें भी होनी चाहिए. नॉनवेज चीजें कम हों, सैचुरेटेड फैट की बजाए अनसैचुरेटेड फैट और बेहद प्रोसेस्ड फूड्स और अलग से मिलाए जाने वाले शुगर कम हों. हमने जिस तरह के भोजन का सुझाव दिया है, वो हर तरह के खाने, अलग-अलग जगह की खेती के तौर-तरीके, वहां रहने वाले लोगों की संस्कृति और हर इंसान की शाकाहारी, मांसाहारी या वेगन डाइट जैसी निजी पसंद-नापसंद पर आधारित है. 
डॉ वाल्टर विलेट

खानपान में बदलाव: क्या शामिल करें?

(फोटो: Arnica Kala/फिट)

EAT-Lancet कमीशन ने दुनिया भर में खानपान के तौर-तरीकों में बदलाव लाने के लिए वैज्ञानिक आधार पर कुछ सुझाव दिए हैं:

  • ऐसी नीतियां बनाएं कि लोग स्वस्थ आहार अपनाने के लिए जागरूक हो सकें
  • कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर फसलों के उत्पादन की रणनीतियों पर फोकस करें
  • तकनीक की मदद से खेती में जमीन और पानी का इस्तेमाल घटाएं ताकि पारिस्थितिक तंत्र (इकोसिस्टम) को संरक्षित किया जा सके
  • खाने की बर्बादी को रोका जाए
  • उन्नत तकनीक और किसानों को शिक्षित किए जाने पर निवेश करें

लांसेट के एडिटर-इन-चीफ डॉ रिचर्ड हॉर्टन कहते हैं:

कमीशन जिस बदलाव की बात करता है, वह सतही और सरल नहीं है. इसके लिए जरूरी है कि जटिल प्रणालियों, इससे होने वाले फायदों और नियमों पर ध्यान दिया जाए. आम नागरिकों और सरकारों को कई स्तरों पर मिलकर काम करने की जरुरत है ताकि हम क्या और कैसे खाते हैं, इसको नए तरह से तय किया जा सके. 
डॉ रिचर्ड हॉर्टन

हेल्दी डाइट से हर साल बच सकती है 1 करोड़ लोगों की जान

(फोटो: Arnica Kala/फिट)

रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में खराब सेहत की मुख्य वजह अनहेल्दी डाइट है. खानपान में हेल्दी बदलाव से हर साल 1.08-1.16 करोड़ मौतों को रोका जा सकता है.

रिपोर्ट में बताई गई डाइट से वैश्विक पोषण में सुधार होगा और इससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी आएगी. ये कमी जलवायु परिवर्तन पर पैरिस समझौते के अनुरूप होगी. इससे बायोडाइवर्सिटी का नुकसान भी कम होगा और खेती के लिए जमीन, पानी और नाइट्रोजन की मांग में भी कमी आएगी.

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