पानी के पांच प्रकार, जानिए इनके फायदे और नुकसान
ये सभी स्वास्थ्य के लिये फायदेमंद होने का दावा करते हैं
ये सभी स्वास्थ्य के लिये फायदेमंद होने का दावा करते हैं(फोटो:iStock)

पानी के पांच प्रकार, जानिए इनके फायदे और नुकसान

अगर आप ये सोचते हैं कि पानी हमेशा एक पारदर्शी, रंगहीन और स्वादहीन द्रव यानी लिक्विड है, तो आपको फिर से सोचने की जरूरत है. जी हां, बाजार में कई तरह के पानी मिलते हैं.

ये सभी स्वास्थ्य के लिये फायदेमंद होने का दावा करते हैं, लेकिन इससे पहले कि आप इनका इस्तेमाल करें. इतने तरह के पानी के बारे में जान लेना बेहतर होगा.

हम यहां पानी के उन्हीं रूपों के बारे में बता रहे हैं, जिसे जानना आपके लिये जरूरी है.

1. एल्कलाइन वॉटर

जरूरत से ज्यादा एल्कलाइन पानी भी हमारे लिये फायदेमंद नहीं होता है
जरूरत से ज्यादा एल्कलाइन पानी भी हमारे लिये फायदेमंद नहीं होता है
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सामान्य पानी का पीएच स्तर लगभग 7 होता है. वहीं एल्कलाइन पानी का पीएच लेवल करीब 8 या 9 होता है और इसका स्वाद थोड़ा कड़वा होता है. हाल ही में कई स्वास्थ्य लाभों के कारण एल्कलाइन वॉटर काफी लोकप्रिय हो गया है.

जर्नल ऑफ द इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन 2016 में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक एल्कलाइन वॉटर बल्ड विस्कॉसिटी कम करता है मतलब हमारी नसों में बहने वाले खून को गाढ़ा नहीं होने देता. इससे हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. साल 2012 में किए गए एक और अध्ययन में कहा गया था कि एल्कलाइन वॉटर से एसिड रीफ्लक्स यानी सीने में जलन में भी फायदेमंद होता है.

लेकिन न्यूट्रिशनिस्ट कविता देवगन का कहना है कि इस तरह के ज्यादातर अध्ययन बड़े पैमाने पर नहीं किए जाते हैं.

रैन्डमाइज्ड कंट्रोल्ड तरीके पर भरोसा करने की बजाय, ये अध्ययन अवलोकन और तर्क पर आधारित हैं.

कविता देवगन ने बताया कि ऐसा लग सकता है कि एल्कलाइन वॉटर हमारी स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहतर है, लेकिन असल में कोई नहीं जानता कि इसके ज्यादा इस्तेमाल से कैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.

एल्कलाइन वॉटर शरीर में अंदरूनी बदलाव ला सकता है.
डॉ अश्विनी सेतिया, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट 

एल्कलाइन वॉटर हमारे पेट में एसिड को निष्क्रिय करता है. भोजन के माध्यम से हमारे पेट तक पहुंचने वाले किसी भी रोगाणुओं को मारने के लिए एसिड रहना भी जरूरी है. इसलिए एल्कलाइन की ज्यादा मात्रा शरीर की अंदरूनी सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकती है.

जरूरत से ज्यादा एल्कलाइन पानी भी हमारे लिये फायदेमंद नहीं होता है. इससे हमारी पाचन क्रिया में दिक्कत होने का खतरा रहता है.

पेप्सीन में पेप्सीनोजेन की सक्रियता जो आदर्श रूप से अम्लीय वातावरण में होती है, क्षारीयता के कारण उसमें देर या दिक्कत होती है.
डॉ अश्विनी सेतिया, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट 

2. कार्बोनेटेड वॉटर

कार्बोनेटेड पानी केवल फिज की वजह से पानी को स्वादिष्ट बनाने का काम करता है
कार्बोनेटेड पानी केवल फिज की वजह से पानी को स्वादिष्ट बनाने का काम करता है
(फोटो:iStock)

कार्बोनेटेड पानी में कोलास जैसे कार्बोनेट नहीं होते हैं. इसके बजाय, यह पानी में दबाव के जरिए कार्बन डाइऑक्साइड पारित कर बनाया जाता है. पानी से निकलने पर यह कार्बन डाइऑक्साइड बुलबुले या फिज (झाग) का रूप लेता है और यही कारण है कि इसे स्पार्कलिंग वॉटर (पानी) भी कहा जाता है.

डॉ सेतिया का कहना है कि कार्बोनेटेड पानी का कोई स्वास्थ्य लाभ नहीं है.

कार्बोनेटेड पानी केवल फिज की वजह से पानी को स्वादिष्ट बनाने का काम करता है.
डॉ अश्विनी सेतिया, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट 

डॉ अश्विनी कहते हैं कि लोगों का यह मानना गलत है कि चमकदार पानी यानी कार्बोनेटेड वॉटर पीने से उनकी एसिडिटी की समस्याएं कम हो जाएंगी. डॉ. सेतिया कहते हैं, "पानी में मिला कार्बन डाइऑक्साइड शरीर में जमा हो जाता है और डकार के रूप में बाहर आता है, जिससे लोगों को बेहतर महसूस होता है."

डॉ अश्विनी सेतिया के मुताबिक यह कुछ लोगों में पेट की कई तरह की दिक्कतों का कारण भी बन सकता है. अगर इसे बहुत ज्यादा मात्रा में लिया गया, तो इससे सूजन, पेट फूलना और अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल दिक्कतें हो सकती हैं.

स्पार्कलिंग पानी में भी हाइड्रेट करने का प्रभाव नियमित पानी की तरह ही होता है, ये थोड़ा महंगा जरूर है. हां, यह कार्बोनेटेड पेय पदार्थों के आदी लोगों के लिए तुलनात्मक रूप से स्वस्थ विकल्प के रूप में कार्य कर सकता है.
कविता देवगन, न्यूट्रिशनिस्ट

3. ऑर्थो वॉटर और पैरा वॉटर

ऑर्थो और पैरा पानी के बारे में बहुत सीमित रिसर्च हुए हैं
ऑर्थो और पैरा पानी के बारे में बहुत सीमित रिसर्च हुए हैं
(फोटो:iStock)

ऑर्थो वॉटर और पैरा वॉटर हाल ही की खोज हैं. पानी के ये दो प्रकार परमाणु (एटॉमिक) स्तर पर एक दूसरे से अलग हैं.

डॉ सेतिया कहते हैं, " हाइड्रोजन के दो एटम और ऑक्सीजन के एक एटम के जुड़ाव में विशेष स्पिन होता है. इसी स्पिन के आधार पर हम उन्हें ऑर्थो या पैरा पानी के रूप में वर्गीकृत करते हैं. पानी में ये दोनों फॉर्म मौजूद होते हैं और इन्हें केवल प्रयोगशाला में अलग किया जा सकता है."

इन दोनों प्रकार के पानी यानी ऑर्थो और पैरा के बारे में बहुत सीमित रिसर्च हुए हैं.

हमें इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है लेकिन निकट भविष्य में इनके बारे में और जानकारी मिलेगी क्योंकि इन्हें लेकर कई शोध किये जाएंगे.
कविता देवगन, न्यूट्रिशनिस्ट

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4. डिटॉक्स वॉटर

एनर्जी ड्रिंक या फ्लेवर्ड सोडा पीने की बजाये, डिटॉक्स पानी पीना बेहतर होता है
एनर्जी ड्रिंक या फ्लेवर्ड सोडा पीने की बजाये, डिटॉक्स पानी पीना बेहतर होता है
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पानी अपने आप में एक डिटॉक्स एजेंट है, लेकिन हम आजकल पानी में डिटॉक्सिफाइंग चीजों को शामिल करने का चलन देख रहे हैं, जो पानी की शक्ति को बढ़ाता है. मिंट, ककड़ी और फलों जैसे तत्व पानी से भरे पिचर में डाल दिए जाते हैं. उस पिचर में पानी को तब 'डिटॉक्स पानी' कहा जाता है.

सुबह में आप फल और सब्जियों को पानी में डाल देते हैं और फिर आप इसे दोपहर तक पीते हैं.
डॉ अश्विनी सेतिया, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट

यह खासकर उन लोगों के लिए अच्छा है, जो साधारण पानी के स्वाद को पसंद नहीं करते हैं.

एनर्जी ड्रिंक या फ्लेवर्ड सोडा पीने की बजाये, डिटॉक्स पानी पीना बेहतर होता है क्योंकि इसमें ना केवल स्वाद होता है बल्कि हमारे सिस्टम को भीतर से साफ करता है.
कविता देवगन, न्यूट्रिशनिस्ट

5. स्टिल वॉटर

फिल्टर किए गए पानी को पीने के लिए सबसे सुरक्षित और शुद्ध माना जाता है
फिल्टर किए गए पानी को पीने के लिए सबसे सुरक्षित और शुद्ध माना जाता है
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नल का सामान्य पानी जो ना कार्बोनेटेड है और ना एल्कलाइन (क्षारीय) है, उसे 'स्टिल वॉटर' कहा जाता है. पोर्टेबल (पीने योग्य) बनने से पहले यह पानी फिल्टर किया जाना चाहिए. फिल्टरिंग या तो RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) या UV (अल्ट्रा बैंगनी) फिल्टर के माध्यम से किया जाता है.

हालांकि फिल्टर किए गए पानी को पीने के लिए सबसे सुरक्षित और शुद्ध माना जाता है, लेकिन सबसे पहले बिना फिल्टर किये गये पानी की स्थिति पर विचार करने की जरूरत है, जो हमारे पास है.

हालांकि RO (आरओ) रोगाणुओं को पानी से दूर रखने के लिए बेहतर है और यह हमारे शरीर के लिए जरूरी बहुत से तत्वों को भी पानी में बरकरार रखता है.
डॉ अश्विनी सेतिया, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट

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