क्या वाकई में जहर है नारियल का तेल?
नारियल के तेल में सैच्युरेटेड फैट की मात्रा बहुत अधिक होती है
नारियल के तेल में सैच्युरेटेड फैट की मात्रा बहुत अधिक होती है(फोटो: iStock)

क्या वाकई में जहर है नारियल का तेल?

हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें हावर्ड की एक प्रोफेसर ने नारियल के तेल को जहर बताया है. इस वीडियो को 10 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है और इस पर कमेंट्स की बाढ़ आई हुई है.

खासकर भारतीय और एशियन लोगों की ओर से, जो नारियल के तेल का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. चाहे खाना पकाना हो या बालों की देखभाल करनी हो, यहां तक कि अल्जाइमर में भी.

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नारियल के तेल पर ये वाद-विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की ओर से लोगों को नारियल तेल का इस्तेमाल न करने की हिदायत दी गई. वो भी तब जब नारियल के कच्चे तेल (वर्जिन कोकोनट ऑयल) को सुपरफूड घोषित कर पूरी दुनिया में बेचा जा रहा है.

नारियल तेल पर हो रहे इस विवाद के बीच मैंने पड़ताल का फैसला किया.

नारियल के उत्पादन में तीसरे नंबर पर है भारत
नारियल के उत्पादन में भारत तीसरे पायदान पर है. यहां 19.8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हर साल 2,044 करोड़ नारियल का उत्पादन होता है. नेस्टर रिसर्च के मुताबिक इस उत्पादन में 40 फीसदी हिस्सा केरल का है. 

आखिर नारियल के तेल को 'जहर' कहा क्यों गया?

ये बात आखिर आई कहां से? नारियल तेल में मौजूद सैच्युरेटेड फैटी एसिड इसे दिल का दुश्मन बनाता है. सैच्युरेटेड फैटी एसिड का संबंध हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियों से है. अमेरिकन डाइटरी गाइडलाइन के मुताबिक रोजाना ग्रहण की जाने वाले कैलोरी में सैच्युरेटेड फैट की मात्रा 10 फीसदी से कम होनी चाहिए.

हावर्ड की प्रोफेसर के मुताबिक नारियल तेल इसलिए खराब है क्योंकि इसमें ऐसे सैच्युरेटेड फैटी एसिड मौजूद होते हैं, जो धमनियों में रुकावट डालते हैं. इसकी तुलना में जैतून का तेल ज्यादा हेल्दी है, जिसमें अनसैच्युरेटेड फैटी एसिड होता है.

फिर क्या इसका मतलब ये है कि सैच्युरेटेड फैटी एसिड इतने खतरनाक होते हैं? मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल में चीफ डाइटीशियन डॉ डेलनाज टी चंदुवाडिया कहते हैं कि असल में इसका संबंध हमारे पूरे आहार से है.

देखिए, पश्चिमी देशों में खाए जाने वाले ज्यादातर खाद्य पदार्थों में सैच्युरेटेड फैटी एसिड ज्यादा मात्रा में होता है. मक्खन, चीज़ और अन्य डेयरी उत्पाद. साथ में बहुत सारे जंक फूड और एनिमल फैट, इसका मतलब है कि सैच्युरेटेड फैट की जितनी जरूरत होती है, उसकी मात्रा कहीं ज्यादा हो जाती है. उनके लिए, नारियल तेल से समस्या हो सकती है. 
नारियल के तेल में मौजूद सैच्युरेटेड फैट क्या इतना खतरनाक है?
नारियल के तेल में मौजूद सैच्युरेटेड फैट क्या इतना खतरनाक है?
(फोटो: iStock)

सैच्युरेटेड फैट को बुरा कहने पर कई शोध के जरिए सवाल उठाया गया है. मेडिकल जर्नल लैंसेट में एक बहुत अहम अध्ययन प्रकाशित किया गया था. इसमें 18 देशों से 135,000 लोगों को शामिल कर बताया गया था कि सैच्युरेटेड फैट की उच्च मात्रा स्ट्रोक का खतरा कम करने से जुड़ी हुई है. साथ ही इसमें कार्डियोवैस्कुलर बीमारी के कारण मौत के जोखिम का कुल वसा और सैच्युरेटेड व अनसैच्युरेटेड फैट से कोई खास संबंध नहीं पाया गया था.

अब इस अध्ययन पर कई कार्डियोलॉजिस्ट ने सवाल उठाया है और बहस जारी है.

ऐसे में हमें क्या करना चाहिए? विशषेज्ञ कहते हैं संतुलन ही इसका एकमात्र उपाय है.

किसी भी चीज की अधिकता नुकसानदायक है. अगर आपका पूरा आहार हेल्दी है, तो एक चम्मच नारियल के तेल से खास असर नहीं पड़ेगा. एक चम्मच वर्जिन नारियल का तेल आपके के लिए कई तरीके से फायदेमंद हो सकता है. 
डॉ चंदुवाडिया

दक्षिण भारत में खाना पकाने से लेकर कई स्वास्थ लाभ के लिए नारियल के तेल का ही इस्तेमाल होता है. इससे अगला सवाल उठता है.

रिफाइंड या शुद्ध नारियल का तेल?

 नारियल का तेल आपके के लिए कई तरीके से फायदेमंद हो सकता है
नारियल का तेल आपके के लिए कई तरीके से फायदेमंद हो सकता है
(फोटो: iStock)

घरों में खाना बनाने के लिए आमतौर पर रिफाइंड कोकोनट ऑयल का इस्तेमाल होता है. किसी भी तेल की रिफाइंमेंट (परिष्करण) प्रक्रिया भले ही अशुद्धियों को निकालकर तेल को ज्यादा साफ बनाती है. लेकिन साथ में उसमें से कुछ पोषक तत्वों को भी निकाल देती है. जैसे मीडियम चेन फैटी एसिड और पॉलीफिनॉल्स. यही वो तत्व हैं, जो नारियल तेल को स्वास्थ्य के लिए बेहतर बनाते हैं.

वर्जिन कोकोनट ऑयल या अनरिफाइंड नारियल का तेल नारियल को दबा कर निकाला जाता है. इस वजह से इसमें सारे पोषक तत्व और यौगिक मौजूद रहते हैं.

पॉलीफिनॉल का संबंध एंटीऑक्सीडेंट्स से है और मीडियम चेन फैटी एसिड के बारे में कहा जाता है कि ये रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और हाई डेन्सिटी लीपोप्रोटीन (HDL) यानी गुड कोलेस्ट्रॉल में इजाफा करते हैं.

शुद्ध नारियल तेल के फायदे

अल्जाइमर

अल्जाइमर के मरीजों को अक्सर एक चम्मच नारियल का कच्चा तेल लेने की सलाह दी जाती है. ऐसा माना जाता है कि अल्जाइमर से पीड़ित मरीजों के दिमाग की तंत्रिका कोशिकाएं ऊर्जा उत्पादन के लिए ग्लूकोज का इस्तेमाल नहीं कर पातीं. नारियल का तेल ऊर्जा स्रोत का विकल्प देता है.

लेकिन इस दावे के ज्यादा प्रमाण नहीं हैं और न ही इस पर कोई पुख्ता वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है.

लिवर की समस्याएं

लिवर के कई मरीजों को वर्जिन नारियल तेल लेने के लिए कहा जाता है. एक बार क्षति पहुंचने के बाद लिवर वसा को पचा नहीं पाता, जिसकी शरीर में ऊर्जा उत्पादन के लिए जरूरत होती है.

नारियल के तेल में पाए जाने वाले मीडियम चेन फैटी एसिड ऐसे मरीजों के लिए अच्छे होते हैं. ऊर्जा के लिए इन फैटी एसिड का ट्रांसपोर्टेशन सीधे लिवर को हो जाता है. ये कोलेस्ट्रॉल की वजह से लिवर में अवरोध होने से बचाव करता है.
कविता देवगन, न्यूट्रिशनिस्ट

मिरगी

बच्चों में मिरगी का इलाज करने के लिए शुद्ध नारियल तेल से तैयार MCT किटोजेनिक आहार का इस्तेमाल होता है. उच्च वसा, निम्न कार्बोहाइड्रेट थेरेपी जिसके जरिए शरीर में ईंधन के तौर पर कार्बोहाइड्रेट की जगह वसा का इस्तेमाल किया जाता है.

त्वचा और बालों की देखभाल

जसलोक हॉस्पिटल में चीफ डाइटीशियन डॉ चंदुवाडिया के मुताबिक नारियल तेल की एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल खूबियां रूखी त्वचा और खुजली से राहत देती हैं. इसमें पाए जाने वाले फैटी एसिड स्कैल्प और बालों को पोषण देते हैं.

पोषक तत्वों का अवशोषण

लाइफस्टाइल मेडिसिन एक्सपर्ट ल्युक कोटिन्हो के मुताबिक नारियल तेल में मौजूद ट्राइग्लिसराइड्स थकान दूर करता है और जरूरी पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायता करता है. ल्युक सुबह और शाम एक चम्मच नारियल का तेल लेने की सलाह देते हैं.

आपके लिए ये भी जानना जरूरी है कि एक चम्मच नारियल के तेल में करीब 120 कैलोरी होती है. इसलिए ये बात याद रखें संतुलित मात्रा में नारियल तेल का इस्तेमाल फायदेमंद होता है, जब तक आपका पूरा आहार संतुलित हो.

(ये स्टोरी पहले Fit पर पब्लिश हुई है. जिसका हिंदी में अनुवाद किया गया है. अनुवाद: सुरभि गुप्ता)

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