सेब के साथ कहीं आप लाखों बैक्टीरिया तो नहीं निगल रहे?
जानिए ये बैक्टीरिया हानिकारक होते हैं या फायदेमंद
जानिए ये बैक्टीरिया हानिकारक होते हैं या फायदेमंद(फोटो: iStock)

सेब के साथ कहीं आप लाखों बैक्टीरिया तो नहीं निगल रहे?

अगली बार जब आप सेब खाएं तो ये याद रखिए कि आप करीब 10 करोड़ बैक्टीरिया निगलने जा रहे हैं और ये बैक्टीरिया हानिकारक या लाभदायक हैं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सेब की पैदावार किस तरह से हुई है.

रिसर्चर्स का कहना है कि सेब में ज्यादातर बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं, लेकिन ये इस पर निर्भर करता है कि आप किस तरह का सेब खाते हैं या सेब ऑर्गेनिक है. उनका कहना है कि जैविक रूप से उगाए गए सेब में परंपरागत रूप से उगाए गए सेब के मुकाबले कई तरह के और संतुलित बैक्टीरिया होते हैं, जो उसे हेल्दी और टेस्टी बनाते हैं.

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ऑस्ट्रिया के ग्रेज यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर गैबरियल बर्ग ने बताया,

“बैक्टीरिया, फंगी और वायरस खाने के जरिए हमारी आंतों में पहुंचते हैं. भोजन पकाने के दौरान इनमें अधिकतर मारे जाते हैं, इसलिए फल और कच्ची सब्जियां विशेष तौर पर आंतों में बैक्टीरिया के महत्वपूर्ण स्रोत हैं.”

Frontiers in Microbiology जर्नल में पब्लिश स्टडी में परंपरागत रूप से भंडारित और खरीदे गए सेबों और ताजा ऑर्गेनिक सेबों के बीच बैक्टीरिया की तुलना की गई.

स्टेम, पील, गुदा, बीज और कैलिक्स (पुंजदल), जहां फूल होता है, का अलग से विश्लेषण किया गया. कुल मिलाकर ये पाया गया कि परंपरागत और ऑर्गेनिक दोनों सेबों में बैक्टीरिया की संख्या समान थी.

बेग ने बताया, "हर सेब के घटकों को औसत रूप से एक साथ रखने पर, हमने अनुमान लगाया कि 240 ग्राम सेब में करीब 10 करोड़ बैक्टीरिया हैं."

अधिकांश बैक्टीरिया बीज में पाए गए और बाकी के अधिकतर फ्लेश में थे.

इसलिए अगर आप बीज कोष को हटा दें तो आपके खाने में बैक्टीरिया की संख्या में 1 करोड़ तक की कमी आ जाएगी.

क्या ये बैक्टीरिया आपके लिए अच्छे हैं?

बेग ने व्याख्या करते हुए कहा, "ताजा और जैविक रूप से प्रबंधित सेबों में परंपरागत रूप से प्रबंधित सेबों की तुलना में महत्वपूर्ण रूप से अधिक विविधता, सम और विशिष्ट बैक्टीरिया का समुदाय पाया जाता है."

बैक्टीरिया का विशिष्ट समूह, जो स्वास्थ्य पर संभावित रूप से असर डालने के लिए जाने जाते हैं, का भी मूल्यांकन जैविक सेब के पक्ष में किया गया.

शोधकर्ताओं का कहना है कि रोग पैदा करने के लिए जाने जाने वाले बैक्टीरियों का समूह 'इसचेरिचिया-शिंगेला' परंपरागत सेबों के नमूनों में पाया गया लेकिन जैविक सेबों में इसकी उपस्थिति नहीं थी."

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