ये कुछ आदतें आपको बना सकती हैं बीमार
शौचालय में फोन ले जाने जैसी रोजमर्रा कीआदतें आपको बीमार कर सकती है
शौचालय में फोन ले जाने जैसी रोजमर्रा कीआदतें आपको बीमार कर सकती है फोटो : iStock/द क्विंट

ये कुछ आदतें आपको बना सकती हैं बीमार

रोज जिम जाकर पसीना बहाने और अच्छे खान-पान के बावजूद अगर आप अक्सर बीमार पड़ जाते हैं, तो आपको अपनी रोजमर्रा की आदतों पर नए सिरे से ध्यान देने की जरूरत है. आप भले ही अपनी सेहत को लेकर सजग हों, लेकिन मामूली सी दिखने वाली इन आदतों की वजह से कब आपकी सेहत को नुकसान पहुंचता है, आपको इसकी भनक तक नहीं लगती.

यहां हम आपको ऐसी ही कुछ आदतों या फिर कहिए बुरी आदतों के बारे में बता रहे हैं, जिनमें सुधार करके आप अपनी सेहत में सुधार ला सकते हैं.

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1. टॉयलेट में मोबाइल का इस्तेमाल

फोन को शौचालय ले जाकर इस्तेमाल करना बुरी आदत है
फोन को शौचालय ले जाकर इस्तेमाल करना बुरी आदत है
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कई लोगों के लिए आजकल स्मार्टफोन जरूरत नहीं, बल्कि एक लत जैसा हो गया है. और ये लत उनके दिलो-दिमाग पर इस कदर हावी है कि शौच के लिए जाते समय भी वे अपने फोन का साथ नहीं छोड़ते. वैसे कुछ लोगों के लिए दिनभर में यही वो खास वक्त होता है, जब वे बेफिक्र होकर अपने फोन में जी-भरकर किसी भी तरह की 'खुराफात' कर पाते हैं. एक वजह तो यह है कि टॉयलेट के अंदर तो आपको देखने वाला कोई नहीं होता.

लेकिन ये आदत आपके स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने के लिए काफी है. टॉयलेट सीट, फ्लश और बाथरूम के सिंक में कई तरह के खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं. शौच करने से लेकर हाथ धोने के बीच के समय में फोन को छूने से उन  बैक्टीरियाओं के लिए आपके शरीर में दाखिल होने का रास्ता साफ हो जाता है. इसके साथ ही यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और आंतों से सम्बंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

2. अस्त-व्यस्त और गंदे हैंडबैग

नियमित रूप से हैंड बैग की सफाई जरूरी है
नियमित रूप से हैंड बैग की सफाई जरूरी है
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महिलाओं के लिए उनका हैंडबैग बेहद करीबी और पसंदीदा चीज है. यही वजह है कि उनके हैंडबैग के अंदर जरूरत का हर सामान मौजूद रहता है. कॉस्मेटिक्स से लेकर कंघी, पेपर स्प्रे से लेकर परफ्यूम स्प्रे, सब कुछ इसमें मैजूद रहता है. मानो उनकी पूरी की पूरी दुनिया ही हैंडबैग के अंदर समा गई हो.

हालांकि जरूरत की हर चीज पास में होना सुविधाजनक है, लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं. अगर लम्बे समय तक हैंडबैग की सफाई न की जाय, तो नोरोवाइरस और एमआरएसए जैसे कीटाणु उसमें पनपने लगते हैं. इसलिए समय-समय पर बैग की सफाई करते रहिये और उसे एंटी-बैक्‍टीरियल कपड़े से पोछते भी रहिये. हो सके तो अपने हैंडबैग को थोड़ा हल्का रखिए.

3. नियमित रूप से बेडशीट न बदलना

बेडशीट और पिलो कवर नियमित रूप से बदलना चाहिए
बेडशीट और पिलो कवर नियमित रूप से बदलना चाहिए
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आप हर वीकेंड पर सोचते हैं कि अगले वीकेंड बिस्तर की चादर बदलनी है. और ऐसा सोचते-सोचते कई बार हफ्तों या (कुछ बैचलर्स के लिए) महीनों तक बीत जाते हैं. कई बार बेडशीट और पिलो कवर को देखकर लगता है कि अभी तो ये गंदे नहीं हुए हैं, बाद में बदल लेंगे. लेकिन जो हमारी आंखों को दिखाई देता है, असलियत में वो होता नहीं.

यूं समझ लीजिए कि धूल के कणों को आपके बिस्तर से बेहद लगाव रहता है. दिनभर में उड़ती धूल बिस्तर पर आकर जमा होती है, जो आपको नजर नहीं आती. साथ ही आपके शरीर से निकलने वाला पसीना और बाहर से आने पर कपड़ों के साथ आए कई तरह के कीटाणु आपके बेडशीट पर जमा होते रहते हैं. इनके ऊपर सोने से कई तरह की एलर्जी और अस्थमा का खतरा रहता है.

हफ्ते में दो बार बेडशीट बदलिए. उन्हें गर्म पानी में धोइये और जब आप न सोयें, तो उन्हें ढककर रखें.

4. डेस्क पर ही खाना

ऑफिस के डेस्क पर खाना बुरी आदत है
ऑफिस के डेस्क पर खाना बुरी आदत है
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अपने डेस्क पर बैठकर खाने वाले लोग अमूमन हर ऑफिस में दिख जाते हैं. ये बहुत ही खराब आदत है, जो चुपचाप आपकी बीमारी की वजह बनती है. आपके की-बोर्ड और डेस्क से होता हुआ हानिकारक बैक्टीरिया आपके खाने के साथ पेट तक पहुंचता है और आपको बीमार करता है.

हमेशा डेस्क से अलग कहीं जाकर खाइए और खाने से पहले और बाद में अच्छी तरह हाथ धोइए.

5. टीवी रिमोट और किचन स्पंज को साफ न करना

अपने टीवी रिमोट को हमेशा साफ रखें
अपने टीवी रिमोट को हमेशा साफ रखें
फोटो : iStock

आपको चैनल बदलते हुए टीवी देखना तो पसंद है, लेकिन क्या कभी उसके रिमोट को साफ करने का ख्याल दिमाग में आता है? अगर अब तक आपने ये नहीं किया है, तो देर मत कीजिए और आज ही अपने रिमोट को साफ कीजिए. लगातार अलग-अलग लोगों के हाथों में इस्तेमाल होने की वजह से रिमोट में कई तरह की गंदगी और बैक्टीरिया जमा होते हैं. इसलिए उन्हें नियमित तौर पर साफ करें.

किचेन साफ करने वाले स्पंज और कपड़े हर बार इस्तेमाल होने के साथ-साथ गंदे होते जाते हैं. पुराना होने पर उन्हें साफ करके दोबारा इस्तेमाल करना समझदारी नहीं, क्‍योंकि वे पूरी तरह साफ नहीं होते. जर्मनी में यूनिवर्सिटी ऑफ फर्टवैंजेन में हुई एक स्टडी के मुताबिक, किचेन स्पंज में उतने ही बैक्टीरिया मौजूद रहते  हैं, जितने इंसानों के मल के सैम्पल में मौजूद रहते हैं.

तो भलाई इसी में है कि स्पंज को साफ रखिए, धोने के बाद उसे पूरा सूखने दीजिये. याद रखिए, इसकी लाइफ उतनी नहीं, जितनी आप समझते हैं. इसलिए उन्हें हर हफ्ते बदलते रहिए.

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