कहीं खतरनाक साबित न हो जाए हर वक्त सेल्फी लेने की आदत
डॉ अग्रवाल के मुताबिक सेल्फी का बुखार दुनिया भर में पिछले दो साल में बढ़ा है.
डॉ अग्रवाल के मुताबिक सेल्फी का बुखार दुनिया भर में पिछले दो साल में बढ़ा है.(फोटो:iStock)

कहीं खतरनाक साबित न हो जाए हर वक्त सेल्फी लेने की आदत

अगर आप हाथ को पूरा तानकर, कलाई को अंदर की ओर मोड़कर कूदते हुए, चट्टानों पर चलते हुए सेल्फी लेते हैं तो यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि इस दौरान ठीक से संतुलन नहीं बना पाने के कारण गिरने पर कलाई में सबसे अधिक चोट आ सकती है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि लोगों को इस तरह से सेल्फी लेने पर सावधानी बरतनी चाहिए.

हार्ट केयर फाउंडेशन ( एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल कहते हैं कि आज की पीढ़ी दूसरों से तारीफ सुनना चाहती है. युवा दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि उन्होंने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे और कोई नहीं कर सकता. सेल्फी लेने में जितनी हिम्मत दिखाई जाए, उतनी ही प्रशंसा मिलती है. इस तरह की सेल्फी से उन्हें अपने साथियों से तुरंत तारीफ मिलती है.

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हम एक ऐसे युग में रहते हैं, जहां मोबाइल फोन ने हमारे जीवन में ऐसी जगह बना ली है कि हमारा लोगों से सीधा संपर्क लगभग ना के बराबर हो गया है. हालांकि टेक्नोलॉजी ने सभी के लिए जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन इसका इस्तेमाल जब बहुत अधिक होने लगता है तो ये गंभीर रूप ले लेती है. इनमें से एक है सेल्फी लेना, इसके मानसिक और शारीरिक दोनों तरह के प्रभाव हैं, जिसमें ‘सेल्फी रिस्ट’ सबसे ताजा है.
डॉ केके अग्रवाल, अध्यक्ष, हार्ट केयर फाउंडेशन

डॉ अग्रवाल के मुताबिक सेल्फी का बुखार दुनिया भर में पिछले दो साल में बढ़ा है. एक बड़ी तादाद में मृत्यु दर और कई बीमारियों से सेल्फी का संबंध पाया गया है.

डिजिटल युग में मॉडरेशन यानी तकनीक का मध्यम उपयोग होना चाहिए. कई उपकरणों का आविष्कार इसलिए किया गया था ताकि हम जिंदगी का बेहतर अनुभव ले सकें, लोगों के साथ अधिक समय बिता सकें और साथ ही अपने लिए कुछ खाली वक्त निकाल सकें, लेकिन हम में से बहुत से लोग उन्हीं उपकरणों के अब गुलाम बन चुके हैं.

अगर जल्द ही एहतियाती उपाय नहीं किए गए, तो इस तरह की लत आगे चलकर सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती है.
डॉ केके अग्रवाल, अध्यक्ष, हार्ट केयर फाउंडेशन

मोबाइल फोन के अधिक उपयोग के कारण होने वाली समस्याओं को रोकने के लिए डॉ अग्रवाल के सुझाव:

  • सोने से 30 मिनट पहले किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का इस्तेमाल ना करें.
  • हर तीन महीने में सात दिन के लिए फेसबुक से ब्रेक लें.
  • हफ्ते में एक बार, पूरे दिन के लिए सोशल मीडिया से दूर रहें.
  • मोबाइल भी अस्पताल में संक्रमण का एक स्रोत हो सकता है, इसलिए, इसे हर दिन कीटाणुरहित किया जाना चाहिए.

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