क्या डायबिटिक लोगों को शुगर फ्री चीजों से कोई नुकसान नहीं होता?
डायबिटिक लोगों को शुगर फ्री प्रोडक्ट्स लेते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
डायबिटिक लोगों को शुगर फ्री प्रोडक्ट्स लेते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?(फोटो: iStock)

क्या डायबिटिक लोगों को शुगर फ्री चीजों से कोई नुकसान नहीं होता?

आप डायबिटिक हैं, लेकिन मीठा खाना चाहते हैं, तो आपके दिमाग में सबसे पहले शुगर फ्री का ख्याल आता है और डायबिटीज के मरीजों के लिए पूरा बाजार भी तैयार है. शुगर फ्री मिठाइयां, लड्डू, केक, पेस्ट्री और साथ में बहुत से शुगर सब्स्टिट्यूट्स, जिनका घर में भी मीठी चीजें बनाने के लिए इस्तेमाल कर लिया जाता है.

लेकिन क्या खाने की शुगर फ्री चीजें वाकई में डायबिटिक लोगों के लिए इतनी बेहतर होती हैं कि वो बिना किसी बात की परवाह किए इनका इस्तेमाल कर सकते हैं? चाय या हलवा चीनी की जगह शुगर फ्री डाल कर खाया जा सकता है? शुगर सब्स्टिट्यूट्स और शुगर फ्री चीजों के बारे में दुनिया भर के विशेषज्ञ, डॉक्टर्स और रिसर्चर्स की क्या राय है?

शुगर सब्स्टिट्यूट्स और शुगर फ्री प्रोडक्ट्स को लेकर फिट ने फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉ रूपक वाधवा और अपोलो हॉस्पिटल में डायबिटीज एजुकेटर विवेका कौल से बात की.

शुगर की जगह शुगर फ्री क्यों?

फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉक्टर रूपक वाधवा कहते हैं कि डायबिटिक लोगों को चीनी एक सीमित मात्रा में लेनी होती है और इसलिए उन्हें रिफाइंड शुगर से बनी मीठी चीजें बिल्कुल ही मना होती हैं.

खाने की कुछ चीजों में चीनी छिपी हुई होती है, जैसे आटा है, उसमें भी कार्बोहाइड्रेट की मात्रा है, लेकिन हम उसे मना नहीं कर सकते हैं क्योंकि ये एक लिमिट में लेनी होती है. जितने भी शुगर होते हैं, जैसे शक्कर, गुड़, शहद, डायबिटीज के मरीजों को इन सबसे परहेज करना होता है. जैसे चाय में एक्स्ट्रा चीनी डालना, जबकि दूध में शुगर की मात्रा है.
डॉ रूपक वाधवा, फोर्टिस हॉस्पिटल

शुगर फ्री शुगर का एक सब्स्टिट्यूट है, जो मीठेपन का एहसास कराता है, लेकिन उनमें कैलोरी नहीं होती है या बहुत कम होती है. चीनी का कैलोरी उत्पादन ज्यादा होता है, इसीलिए डायबिटीज में चीनी खाना मना किया जाता है. 5 ग्राम चीनी में करीब 20-25 कैलोरी होती है.

डायबिटीज की बीमारी में कैलोरी इनटेक लिमिट करना होता है. शुगर फ्री खाने या ड्रिंक को मीठा तो बना देती हैं, लेकिन इनमें उतनी कैलोरीज नहीं होती हैं, जितनी कि चीनी में होती है. साथ ही ये टेस्ट में मीठी भी लगती हैं.

क्या डायबिटीज में शुगर फ्री लेना सही है?

डायबिटीज की बीमारी में कैलोरी इनटेक लिमिट करना होता है.
डायबिटीज की बीमारी में कैलोरी इनटेक लिमिट करना होता है.
(फोटो: iStock)

डॉ वाधवा के मुताबिक ये शुगर फ्री पर डिपेंड करता है. नैचुरल इंग्रेडिएंट्स वाले शुगर फ्री ज्यादा अच्छे होते हैं बजाए उनके जिनमें कैमिकल ज्यादा यूज होता है. अब ऐसे शुगर फ्री प्रोडक्ट्स आ रहे हैं, जिनमें नैचुरल इंग्रेडिएंट्स होते हैं.

आजकल कैमिकल वाले शुगर फ्री कम आ रहे हैं क्योंकि हड्डियों पर इनका साइड इफेक्ट पड़ता है, इनकी ज्यादा मात्रा से दिखाई देने में दिक्कत हो सकती है. ज्यादा डोज से कैंसर होने का खतरा होता है. इसलिए प्रोडक्ट लेबल देखकर कैमिकल्स का पता लगाया जा सकता है. पहले भी डॉक्टर्स शुगर फ्री की दो गोलियां ही लेने को कहते थे, उससे ज्यादा शुगर फ्री लेना अलाउ नहीं किया जाता था. 
डॉ रूपक वाधवा, फोर्टिस हॉस्पिटल

अपोलो हॉस्पिटल में डायबिटीज एजुकेटर विवेका कौल कहती हैं कि डायबिटिक लोगों के लिए चीनी के विकल्प के तौर पर आने वाले शुगर फ्री प्रोडक्ट्स भी कभी-कभी स्मॉल पोर्शन में ही लेने की सलाह दी जाती है.

शुगर फ्री में स्टीविया को बेहतर माना जाता है क्योंकि ये प्लांट से निकलता है. अब स्टीविया की पत्तियां भी मिल रही हैं. उसे उबाल कर इस्तेमाल किया जा सकता है.
विवेका कौल, डायबिटीज एजुकेटर, अपोलो हॉस्पिटल

डॉ वाधवा के मुताबिक स्टीविया नैचुरल स्वीटनर है, लेकिन इसका यूज भी लिमिटेड होना चाहिए.

Healthline.com के मुताबिक स्टीविया इस्तेमाल करने का सबसे बेस्ट तरीका है कि इसका पौधा खुद लगाया जाए और फिर उसकी पत्तियां इस्तेमाल की जाएं क्योंकि इससे तैयार शुगर सब्स्टिट्यूट्स प्रोसेस्ड होते हैं और उनमें कई और अवयव भी होते हैं. साथ ही प्रोसेस्ड स्टीविया स्वीटनर्स पर और रिसर्च की जरूरत है.

क्या दिल खोलकर खा रहे हैं शुगर फ्री मिठाइयां और लड्डू?

शुगर फ्री से बनी खाने की चीजें जरूरी नहीं है कि कार्बोहाइड्रेट फ्री हों या उनमें लो कार्बोहाइड्रेट हो.
शुगर फ्री से बनी खाने की चीजें जरूरी नहीं है कि कार्बोहाइड्रेट फ्री हों या उनमें लो कार्बोहाइड्रेट हो.
(फोटो: iStock)
मार्केट में जो शुगर फ्री मिठाइयां, लड्डू या केक मिलते हैं, उनमें चीनी नहीं होती, लेकिन मिठाई में खोया है, घी है, केक में क्रीम है, ये भी हाई कैलोरी वाली चीजें हैं, जिन्हें सीमित मात्रा में ही दिया जा सकता है. ऐसा नहीं है कि डाइट में इनकी मात्रा को बढ़ा सकते हैं.
डॉ रूपक वाधवा, फोर्टिस हॉस्पिटल

शुगर फ्री से बनी खाने की चीजें जरूरी नहीं है कि कार्बोहाइड्रेट फ्री हों या उनमें लो कार्बोहाइड्रेट हो. भले ही उनके शुगर फ्री होने का दावा किया जा रहा हो. इसलिए हो सकता है कि शुगर फ्री से तैयार ड्रिंक्स, मिठाइयां और दूसरी चीजों में हाई कैलोरी हो.

विवेका कौल कहती हैं कि इन सभी उत्पादों में कैलोरीज होती हैं, इसलिए डिपेंड करता है कि इनमें कौन सा शुगर फ्री यूज किया जा रहा है. डायबिटिक लोगों को शुगर फ्री प्रोडक्ट्स कभी-कभी लेने को कह दिया जाता है, लेकिन हम ऐसी चीजें बहुत कम मात्रा में ही लेने को कहते हैं.

अगर मरीज का शुगर अंडर कंट्रोल है और उसे मीठा खाने की बहुत ज्यादा इच्छा हो रही है तो कभी-कभी शुगर फ्री लेने की बजाए डायरेक्ट शुगर लेने को कह दिया जाता है, लेकिन बहुत ही कम मात्रा में. डायबिटिक लोगों को बेहद सावधानी के साथ डॉक्टर की सलाह पर ही मीठी चीजें लेनी चाहिए.
विवेका कौल, डायबिटीज एजुकेटर, अपोलो 

अहम है कैलोरी पर ध्यान देना

डॉ वाधवा इस बात पर जोर देते हैं कि डायबिटीज के मरीजों को लिमिटेड कैलोरीज में खाना होता है, जैसे किसी का वजन ज्यादा हो तो उसे 1,800 कैलोरी की डाइट देते हैं, जिनका वेट कम है, उन्हें 2,000-2,200 कैलोरी की डाइट देते हैं या जो बहुत ज्यादा ओवरवेट होते हैं, उन्हें 1,500 कैलोरी की डाइट भी देनी पड़ती है.

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प्रेग्नेंट लेडीज और बच्चे न लें शुगर फ्री

कई शुगर सब्स्टिट्यूट्स के लेबल पर भी लिखा होता है कि इसका इस्तेमाल बच्चे न करें.
कई शुगर सब्स्टिट्यूट्स के लेबल पर भी लिखा होता है कि इसका इस्तेमाल बच्चे न करें.
(फोटो: iStock)

डॉ वाधवा कहते हैं कि प्रेग्नेंट लेडीज और बढ़ते हुए बच्चों को शुगर फ्री प्रोडक्ट्स का यूज नहीं करना चाहिए.

आप लोगों ने ध्यान दिया होगा कि जितने भी डाइट ड्रिंक्स आते हैं, ये 6 साल से कम उम्र के बच्चों को देने से मना किया जाता है. ड्रिंक्स पर भी ये वॉर्निंग होती है.
डॉ रूपक वाधवा, फोर्टिस हॉस्पिटल

डॉ वाधवा के मुताबिक अगर डायबिटिक बच्चों को मीठा खाने का बहुत मन हो रहा है, तो जैसे सेब है, वो मीठा ही है, उसमें चीनी नहीं है. वो ले सकते हैं.

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आर्टिफिशियल स्वीटनर्स पर विवाद

Healthline.com के मुताबिक कुछ आर्टिफिशियल स्वीटनर्स शुगर फ्री और डायबिटिक फ्रेंडली होने का दावा करते हैं, लेकिन कुछ अध्ययनों के मुताबिक असल में इनका बुरा असर पड़ता है.

आर्टिफिशियल स्वीटनर्स को लेकर काफी विवाद रहा है कि इनसे कैंसर सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा होने की बात भी कही जाती रही है. 70 के दशक में किए गए कुछ अध्ययनों के मुताबिक लैबोरेटरी रैट्स में आर्टिफिशियल स्वीटनर सैक्रीन का ब्लैडर कैंसर से संबंध पाया गया था. फिर 90 के दशक में वैज्ञानिकों ने पाया कि इंसानों में इससे कैंसर नहीं होता. हालांकि सेंटर फॉर साइंस इन दि पब्लिक इंटरेस्ट (CSPI) इसके इस्तेमाल की सलाह नहीं देती है.

दुनिया भर में एस्पार्टेम सबसे ज्यादा बेचे जाने वाला स्वीटनर है, जो चीनी से 200 गुना ज्यादा मीठा होता है, इसे अमेरिका की FDA (Food and Drug Administration), WHO (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन) और FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया) से मान्यता मिली हुई है.

कई शुगर सब्स्टिट्यूट्स में एस्पार्टेम का इस्तेमाल होता है, लेकिन साथ ही इन पर ये भी लिखा होता है कि इसका इस्तेमाल बच्चे न करें.

मायो क्लिनिक के मुताबिक आम तौर पर आर्टिफिशियल स्वीटनर्स ब्लड शुगर लेवल नहीं बढ़ाते, लेकिन कोई भी शुगर सब्स्टिट्यूट इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

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