शुगर इंडस्ट्री ने हमेशा आपसे झूठ बोला,आखिर उनका झूठ पकड़ा गया
शुगर इंडस्ट्री का वैज्ञानिक तथ्यों में हेराफेरी का लंबा इतिहास रहा है.
शुगर इंडस्ट्री का वैज्ञानिक तथ्यों में हेराफेरी का लंबा इतिहास रहा है.(फोटो: iStock)

शुगर इंडस्ट्री ने हमेशा आपसे झूठ बोला,आखिर उनका झूठ पकड़ा गया

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को के ऐतिहासिक दस्तावेजों की बदौलत शुगर इंडस्ट्री का सबसे बड़ा झूठ पकड़ा गया है. कार्डियोवस्कुलर (वाहिका तंत्र) बीमारियों में शुगर के असर का पता लगाने के लिए शुगर इंडस्ट्री ने 1960 में चूहों पर परीक्षण किया था.

The New York Times की रिपोर्ट के मुताबिक, जब शुरुआती नतीजे अपने पक्ष में नहीं आए तो उन्होंने स्टडी बंद कर दी. ये दस्तावेज सबसे पहले PLOS Biology. में प्रकाशित हुए.

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दस्तावेज बताते हैं कि 1968 में ‘शुगर रिसर्च फाउंडेशन’ नाम का एक ट्रेड ग्रुप, जो अब शुगर एसोसिएशन के नाम से जाना जाता है, ने जानवरों पर एक शोध परियोजना को मदद दी थी जिससे दिल की सेहत और शुगर के बीच संबंध का पता लगाया जा सके. इसका नाम ‘प्रोजेक्ट 259’ रखा गया था. अध्ययन में यह सामने आया कि शुगर ना सिर्फ दिल की बीमारियों को बढ़ाती है, बल्कि इससे ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर का भी खतरा है.

इस प्रोजेक्ट के तहत चूहों के दो ग्रुप पर अध्ययन किया गया. एक ग्रुप को ज्यादा सुक्रोज (टेबल शुगर) वाला खाना दिया गया, जबकि दूसरे ग्रुप को इसकी जगह स्टार्च दिया गया.

शुरुआती नतीजे बता रहे थे कि ज्यादा शुगर वाली डाइट ट्राईग्लीसेराइड्स को बढ़ा देती है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. एक और ज्यादा खतरनाक नतीजा यह सामने आया था कि जिन चूहों को सुक्रोज (गन्ने से तैयार चीनी का मुख्य तत्व) दिया गया था, उन्होंने बीटा-ग्लूक्योरोनाइड्स नाम का एक एंजाइम बहुत ज्यादा मात्रा में उत्सर्जित किया था. अलग-अलग वक्त पर प्रकाशित तीन अध्ययनों में यह पाया गया था कि इस एंजाइम के कारण ब्लैडर कैंसर होता है.

जिस समय यह अध्ययन शुरू किया गया था, उस समय शुगर इंडस्ट्री दिल की बीमारियों और शुगर के बीच संबंध को खारिज किए जाने को लेकर दबाव में थी. पूर्व में जारी किए गए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि 1967 में शुगर इंडस्ट्री ने हार्ट की बीमारियों के लिए शुगर के बजाय सैचुरेटेड फैट को जिम्मेदार बताने के लिए किस तरह हार्वर्ड के दो प्रभावशाली वैज्ञानिकों को घूस दी थी. हालांकि ये दस्तावेज 50 साल पुराने हैं, लेकिन फिर भी इनका महत्व कम नहीं है.

शुगर इंडस्ट्री का हमेशा से वैज्ञानिक तथ्यों में हेराफेरी का लंबा इतिहास रहा है.
स्टैंटन ग्लांत्ज, यूसीएफएफ में मेडिसिन के प्रोफेसर (न्यूयार्क टाइम्स )

यह घटना याद दिलाती है कि किस तरह टोबैको इंडस्ट्री ने तंबाकू के असर को लेकर झूठ बोला या इसने किस तरह ऐसे अध्ययनों को ठप करने की कोशिश की. यह मामला संबंधित उद्योग की निगरानी में होने वाले अध्ययनों और उनकी विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़ा करता है.

(द न्यूयॉर्क टाइम्स के इनपुट के साथ)

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