डायबिटीज से पुरुषों में इनफर्टिलिटी का खतरा महिलाओं से ज्यादा
 इस बीमारी से पीड़ित महिलाओं की तुलना में पुरुषों पर इसका बुरा प्रभाव ज्यादा दिखता है.
इस बीमारी से पीड़ित महिलाओं की तुलना में पुरुषों पर इसका बुरा प्रभाव ज्यादा दिखता है.(फोटो:iStock)

डायबिटीज से पुरुषों में इनफर्टिलिटी का खतरा महिलाओं से ज्यादा

डायबिटीज लंबे समय से चली आ रही एक बीमारी है, लेकिन इस बीमारी के लिये कोई भी प्रभावी दवा साल 1922 तक उपलब्ध नहीं थी. फिर इंसुलिन से इस रोग के इलाज और इसे कंट्रोल करने की बात सामने आई. कई रिसर्च और ट्रीटमेंट उपलब्ध होने के बावजूद, डायबिटीज के बारे में एक बात परेशान करती है और वो ये है कि इस बीमारी से पीड़ित महिलाओं की तुलना में पुरुषों पर इसका बुरा प्रभाव ज्यादा दिखता है.

और इसकी वजह क्या है?

चंडीगढ़ स्थित एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ कुशल अरोड़ा कहते हैं, ‘डायबिटीज के प्रभाव के इस अंतर के लिये कई फैक्टर जिम्मेदार हैं. पहला कारण शारीरिक बनावट - पुरुषों और महिलाओं के शरीर की बनावट अलग होती है.’

पुरुषों की स्थिति

महिलाओं की तुलना में पुरुषों के शरीर के ऐसे हिस्सों में वसा अधिक जमा होता है, जो स्वास्थ्य के लिये खतरनाक है.
महिलाओं की तुलना में पुरुषों के शरीर के ऐसे हिस्सों में वसा अधिक जमा होता है, जो स्वास्थ्य के लिये खतरनाक है.
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डायबिटीज कई कारणों से खतरनाक है.

डायबिटीज से पीड़ित लोगों में ब्लड शुगर लेवल का कम होना खतरनाक परिस्थितियों का कारण बन सकता है और लंबे समय तक लगातार हाई शुगर लेवल होने से हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य गंभीर स्थितियों का खतरा रहता है. 
डॉ कुशल अरोड़ा

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें आमतौर पर अपर्याप्त इंसुलिन के कारण ब्लड शुगर बहुत अधिक होता है. अगर इसे कंट्रोल करने के लिये इलाज और उपयुक्त परहेज नहीं किया गया तो आगे चलकर ये कई तरह की परेशानियों का कारण बन सकता है. इन गंभीर परेशानियों में अंधापन ("रेटिनोपैथी"), किडनी का फेल होना और जीवित रहने के लिये डायलिसिस मशीन पर निर्भरता ("नेफ्रोपैथी") के साथ पैरों को काटने तक की नौबत शामिल है.

इसलिए डायबिटीज में लापरवाही या सही समय पर इलाज नहीं कराने की वजह से नर्व (तंत्रिका) और किडनी पर बुरा असर, दिल के दौरे, स्ट्रोक और आंखों की रोशनी कम होने का खतरा हो सकता है.

लेकिन पुरुषों में, डायबिटीज से कई और तरह की परेशानियां होने की संभावना भी बनी रहती है जैसे- नपुंसकता, टेस्टोस्टेरोन का कम होना- जो अवसाद और चिंता का कारण बन सकता है.
डॉ महिंदर वत्स, यौन चिकित्सा विशेषज्ञ

इसके अलावा, 2016 में बीएमजे (BMJ) ओपन पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि वजन बढ़ने पर महिलाओं की तुलना में पुरुषों को डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है.

यह अध्ययन बताता है कि पुरुष बायोलॉजिकल रूप से कैसे अधिक संवेदनशील हैं और महिलाओं की तुलना में कम वजन बढ़ने के बावजूद उनको डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है. महिलाओं की तुलना में पुरुषों के शरीर के कई ऐसे हिस्सों में वसा अधिक जमा होता है, जो स्वास्थ्य के लिये खतरनाक होता है.

पुरुषों मे स्मोकिंग की प्रवृति ज्यादा होती है. हालांकि, स्वास्थ्य के नजरिये से स्मोकिंग हर किसी के लिए खतरनाक है, लेकिन डायबिटीज से ग्रस्त लोगों के लिये स्मोकिंग विशेष रूप से एक बड़ा खतरा है क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं को पतला (संकरा) करता है, जिससे हाई ब्लडप्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक, डायबिटीज से संबंधित यौन समस्याएं और शरीर के किसी अंग के खराब होने का जोखिम रहता है.

जो भी स्मोकिंग करता है, उसमें दिल का दौरा पड़ने का जोखिम तीन गुना बढ़ जाता है. लेकिन जब डायबिटीज से पीड़ित लोग स्मोकिंग करते हैं तो इन लोगों में दिल का दौरा पड़ने का खतरा लगभग 10 गुना बढ़ जाता है. पुरुषों में डायबिटीज की परेशानी से दिल की बीमारी का जोखिम दो से तीन गुना और बढ़ जाता है. 
डॉ अनुराग शर्मा, चंडीगढ़ के कार्डियोलॉजिस्ट

डायबिटीज और पुरुषों में यौन समस्याएं

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डायबिटीज का असर पुरुषों की सेक्स लाइफ पर भी पड़ता है. डायबिटीज से पीड़ित पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (स्तंभन दोष) की संभावना ज्यादा होती है, जो उनकी सेक्स लाइफ को प्रभावित करती है.

इसका मतलब यह है कि वे यौन संबंध बनाने में असमर्थ होते हैं, क्योंकि इसके प्रभाव से पेनिस के इरेक्शन (सीधा होने) में दिक्कत होती है या ज्यादा देर तक इरेक्शन नहीं हो पाता है.

पेनिस में ब्लड फ्लो और एक बेहतर नर्व (तंत्रिका) सप्लाई पर इरेक्शन निर्भर करता है.

प्रोजेक्ट होप और इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन से प्रमाणित, न्यूट्री एक्टिवानिया की संस्थापक अवनी कौल, न्यूट्रिशनिस्ट और वेलनेश कोच कहती हैं:

हालांकि पुरुषों में डायबिटीज के प्रभावों की तुलना करना चिंताजनक हो सकता है, अच्छी बात यह है कि यदि आप अपने ब्लड शुगर को सामान्य सीमा (नॉर्मल रेंज) के आसपास रखते हैं, तो इन परेशानियों से बचा जा सकता है.

ब्लड शुगर का लेवल अच्छी तरह से नियंत्रित नहीं होने पर डायबिटीज शरीर की रक्त वाहिकाओं और नसों को प्रभावित कर सकता है.
अवनी कौल

सेक्सुअल मेडिसिन एक्सपर्ट, डॉ महिंदर वत्स कहते हैं, ‘रक्त प्रवाह में जटिलता शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित कर सकता है- यह पैर, हाथ या अन्य कोई अंग हो सकता है, प्रभावित अंग में आप किसी भी तरह का एहसास महसूस नहीं करेंगे.’

किसी भी तरह का एहसास ना होने की यह परेशानी नसों में क्षति (नर्व डैमेज) के कारण होती है, जिसे न्यूरोपैथी कहा जाता है. रक्त आपूर्ति में क्षति से पेनिस में ब्लड के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करने वाली तंत्रिकाओं (नर्व्स) की उत्तेजना और प्रतिक्रिया प्रभावित होती है.
डॉ महिंदर वत्स

पुरुषों में सेक्स के दौरान परफॉर्मेंस को लेकर चिंता कभी-कभी उनके लिये मनोवैज्ञानिक परेशानी का कारण भी बन जाता है और यह पूरी तरह से एक अलग मुद्दा है.

लंबे समय से हाई ब्लड शुगर लेवल से पीड़ित होने पर महिलाओं को भी यौन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं में इस बीमारी के कारण सेक्स के प्रति उत्साह और कामेच्छा कम हो सकती है. ऐसे में महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) होने की अधिक संभावना होती है, जिसकी वजह से फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं.

इन बातों का रखें ध्यान

(फोटो:iStock)

हालांकि पुरुषों में डायबिटीज के प्रभावों की तुलना करना चिंताजनक हो सकता है, अच्छी बात यह है कि यदि आप अपने ब्लड शुगर को सामान्य सीमा (नॉर्मल रेंज) के आसपास रखते हैं, तो इन परेशानियों से बचा जा सकता है.

डायबिटीज के शुरुआती स्टेज में या डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिये इसे कंट्रोल में रखने का सबसे बेहतर तरीका है स्वस्थ डाइट और नियमित एक्सरसाइज को फॉलो करना.
डॉ अनुराग शर्मा

ब्लड शुगर के लेवल का सावधानीपूर्वक प्रबंधन आपको डायबिटीज से जुड़ी कुछ स्वास्थ्य जटिलताओं से बचने में मदद कर सकता है.

आप हर दिन कैलोरी की मात्रा को सीमित करने की पूरी कोशिश करें. इसका मतलब है कि अपने खाने से मिलने वाली कैलोरी की मात्रा पर नजर बनाये रखें. खाने की प्लेट में भोजन का छोटा हिस्सा रखें और धीरे-धीरे खाएं ताकि आपके शरीर को यह जानने का मौका मिल सके कि कितना खाना आपके लिये पर्याप्त है. 
अवनी कौल

"ब्लड शुगर को कम रखने का सबसे अच्छा तरीका स्वस्थ आहार और नियमित एक्सरसाइज करना है."

डॉ कुशल अरोड़ा कहते हैं, सप्ताह में 4 या 5 बार सिर्फ 20 मिनट तक टहलना आपके ब्लड शुगर को कम करने में चमत्कारी साबित हो सकता है.

डायबिटीज को कंट्रोल रखने में दूसरी बड़ी चीज अपनी डाइट में सैचुरेटेज फैट की मात्रा (कार्डियोवैस्कुलर जटिलताओं के जोखिम को ध्यान में रखते हुए) को सीमित करना है.

विशेष रूप से आपको इन खाद्य पदार्थों की कटौती करना है: फुल क्रीम दूध,पनीर, आइसक्रीम, फास्ट फूड, मक्खन, बेकन, सॉसेज, बीफ, चर्बीयुक्त चिकन (चर्बी रहित चिकन ठीक है), डोनट्स, कुकीज, चॉकलेट, कुछ नट्स और फास्ट फूड .
अवनी कौल

विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम का अनुभव रखने वाली आरती के. सिंह एक स्वतंत्र लेखिका हैं. रेडियो, टीवी और प्रिंट मीडिया में काम करने के बाद वह अपने बेटे को पालने और पीएचडी करने के साथ दुनिया को रीडिस्कवर करने में जुटी हैं.)

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