टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी से ठीक हो सकता है बड़ी आंत का कैंसर
टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी ने बड़ी आंत के कैंसर के इलाज को असरदार बना दिया है.
टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी ने बड़ी आंत के कैंसर के इलाज को असरदार बना दिया है.(फोटो: iStock)

टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी से ठीक हो सकता है बड़ी आंत का कैंसर

टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी बड़ी आंत के कैंसर यानी कोलोरेक्टल कैंसर में इलाज के नए और असरकारी तरीके हैं.

टारगेटेड थेरेपी में दवाएं कैंसर वाली जगह को लक्ष्य बनाती हैं और पारंपरिक कीमोथेरेपी की दवाओं के साथ दी जाती हैं ताकि कैंसर की अधिक कोशिकाएं मर जाएं और रोगी के बचने की संभावना बढ़ जाए.

इम्यूनोथेरेपी की दवाएं शरीर के इम्यून सिस्टम को ताकत देती हैं और फिर प्रतिरक्षा तंत्र खुद ही कैंसर की कोशिकाओं से लड़ता है, जिससे दुष्प्रभाव लगभग खत्म हो जाते हैं.

राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के डायरेक्टर डॉ विनीत तलवार के मुताबिक टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी ने बड़ी आंत के कैंसर के इलाज को असरदार बना दिया है.

डॉ तलवार ने बताया कि केवल कीमोथेरेपी से रोगियों के बचने की दर कम थी, लेकिन टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी के साथ बचने की दर बढ़ गई है.

कोलोरेक्टल कैंसर के उपचार में विकिरण यानी रेडिएशन की भूमिका पर राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डायरेक्टर डॉ मुनीश गैरोला ने कहा, "निस्संदेह बड़ी आंत के कैंसर में उपचार के लिए सर्जरी ही चुनी जाती है, लेकिन रेडिएशन ट्यूमर के आकार को कम करने में मदद करता है, जिससे सर्जन को ऑपरेशन करने में आसानी होती है और बीमारी फैलने की आशंका कम हो जाती है. इससे बचने की संभावना बहुत बढ़ जाती है."

कीमोथेरेपी रेडियो सेंसिटाइजर की तरह काम कर रेडिएशन के प्रभाव को बढ़ा देती है, जिससे रेडिएशन ऊतकों में गहराई तक पहुंच जाता है. रेडिएशन में काफी प्रगति हो चुकी है. पहले रेडिएशन के बहुत दुष्प्रभाव होते थे, लेकिन अब रेडिएशन की ज्यादा केंद्रित तकनीक ‘कन्फॉर्मल रेडिएशन’ हैं, जिनके जरिए हम रेडिएशन को ट्यूमर की आकृति के मुताबिक सीमित कर सकते हैं.
डॉ मुनीश गैरोला, डायरेक्टर, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर

भारत में बड़ी आंत का कैंसर सबसे ज्यादा होने वाले 10 प्रकार के कैंसर में शामिल है. मोटापे और कम मोटे अनाज वाली खुराक को इस प्रकार के कैंसर का कारण माना जाता है. कुछ मामलों में यह आनुवंशिक भी होता है.

इससे बचने के लिए लोगों को फाइबर वाला भोजन अधिक लेना चाहिए.

एल्कोहल और स्मोकिंग से दूर रहना चाहिए. डॉक्टर्स के मुताबिक सुस्त और गतिहीन जीवनशैली भी बड़ी आंत के कैंसर का कारण है.

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