Members Only
lock close icon
Home Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019Hindi Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019Fit Created by potrace 1.16, written by Peter Selinger 2001-2019प्रदूषित नल के पानी में दुनिया में तीसरे नंबर पर भारत

प्रदूषित नल के पानी में दुनिया में तीसरे नंबर पर भारत

बहुत छोटे माइक्रोप्लास्टिक्स, केमिकल्स वॉटर फिल्टर को पार कर सकते हैं और ‘साफ पानी’ में मिल सकते हैं.

आशा रितु
फिट
Published:
प्रतीकात्मक चित्र
i
प्रतीकात्मक चित्र
फोटो: iStock

advertisement

आर्ब मीडिया द्वारा नल के पानी के प्रदूषण के संबंध में एक स्टडी करवाई गई है. इसके लिए दुनिया भर से सैंपल इकट्ठे किए गए. स्टडी के रिजल्ट चौंकाने वाले हैं.

स्टडी के लिए गए सैंपल में से 83 फीसदी माइक्रोप्लास्टिक से दूषित पाए गए. भारत से लिए गए सैंपल में से 82.4 दूषित पाए गए. स्टडी के लिए सैंपल नई दिल्ली से लिए गए थे.

94.4 प्रतिशत के साथ अमेरिका इस लिस्ट में सबसे ऊपर है. इसके बाद थोड़े ही अंतर से 93.8 प्रतिशत के साथ लेबनान दूसरे नंबर पर है. लिस्ट में तीसरे नंबर पर भारत है.

भारत के हैरानी भरे आंकड़े

नई दिल्ली में 17 जगहों से इकट्ठा किए गए सैंपल में से 14 में माइक्रोस्कोपिक प्लास्टिक फाइबर पाए गए. वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट के आंकड़े दिखाते हैं कि 13 करोड़ भारतीय ऐसे इलाकों में रहते हैं, जहां जमीन का पानी दूषित है. इसलिए यह संभव है कि आपके नल में आने वाला पानी बहुत ज्यादा दूषित हो.

स्टडी में यह भी देखा गया कि भारत में प्रति दिन 15,342 टन प्लास्टिक वेस्ट पैदा हुआ था. इसमें से केवल 9,205 टन को ही रिसाइकिल किया गया था. इसके लिए आंकड़े केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड से लिए गए हैं.

ऐसे समय जब हम पूरे देश में अनिश्चित मानसून और ताजे पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं, ये आंकड़े अच्छे भविष्य की ओर इशारा नहीं करते.

शोध करने वाले इंस्टीट्यूट में डॉ. ऐने मैरी माहन ने कहा, नल के पानी के सैंपल में नैनोपार्टिकल्स मौजूद थे, जो मापे नहीं जा सकते थे और ऐसे नैनोपार्टिकल्स, ह्यूमन आर्गन में कोशिकाओं के जरिए घुस भी सकते थे.

क्या फिल्टर मदद कर सकता है?

वरिष्ठ वैज्ञानिक राजर्षि बनर्जी कहते हैं कि, ‘ प्योरीफायर कंपनियां कहती हैं कि उनके फिल्टर्स माइक्रोन साइज के माइक्रोप्लास्टिक्स को ब्लॉक कर सकती हैं. हालांकि, कंपनियां नैनो माइक्रोप्लास्टिक्स को लेकर यह दावा नहीं करतीं.

बहुत छोटे आकार के माइक्रोप्लास्टिक्स, वॉटर फिल्टर केमिक्लस को पार कर सकते हैं और ‘साफ पानी’ में मिल सकते हैं.
राजर्षि बैनर्जी, वरिष्ठ वैज्ञानिक

महर्षि के मुताबिक, वह अभी तक किसी भी ऐसे वॉटर प्यूरीफायर के बारे में नहीं जानते जो माइक्रोप्लास्टिक्स को फिल्टर करने का दावा करता है.

माइक्रोप्लास्टिक्स, प्लास्टिक फाइबर के छोटे टुकड़े हैं, जो आमतौर पर 5 MM लंबे होते हैं. ये बायोडिग्रेडेबल नहीं होते. लेकिन ये अपने आप छोटे-टुकड़ों में टूटते हैं

माइक्रोप्लास्टिक के स्रोत

सिन्थेटिक कपड़े, पेंट, टायर की गंदगी

द्वितीयक माइक्रोप्लास्टिक्स

बैग, स्ट्रॉ, फॉर्क

माइक्रोबीड्स

टूथपेस्ट, कॉस्मैटिक प्रोडक्ट्स

माइक्रोप्लास्टिक को फैलने से कैसे रोकें?

- प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल न करें

- प्लास्टिक वॉटर बॉटल को खरीदने से बचें, दोबारा उपयोग होने वाली चीजों का इस्तेमाल करें.

- प्लास्टिक की जगह कांच खरीदें.

- पहिये की गंदगी को कम करने के लिए सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करें.

- अपने सिंथेटिक कपड़ों को बार-बार न धोएं.

तुरंत समाधान

आप किसी भी रूप में प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचें. हालांकि,स्टडी ने माइक्रोप्लास्टिक्स के कारण होने वाली विशिष्ट स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में नहीं बताया है, ऐसे में बचाव ही एक रास्ता हो सकता है.

प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने से ही हम माइक्रोप्लास्टिक को फैलने से रोक सकते हैं. प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट का बड़े स्तर पर नियमित करने की जरूरत है.

Become a Member to unlock
  • Access to all paywalled content on site
  • Ad-free experience across The Quint
  • Early previews of our Special Projects
Continue

Published: undefined

ADVERTISEMENT
SCROLL FOR NEXT