साइनोसाइटिस से लड़ने के 7 उपाय: भाप, चाय और बहुत कुछ
क्या अदरक, हल्दी की चाय साइनोसाइटिस में आराम दे सकती है?
क्या अदरक, हल्दी की चाय साइनोसाइटिस में आराम दे सकती है? (फोटो: iStockphoto)  

साइनोसाइटिस से लड़ने के 7 उपाय: भाप, चाय और बहुत कुछ

मौसम में बदलाव के साथ आप अपने आसपास छींकों और सुड़कती नाकों की आवाजें सुन रहे होंगे. असल में मौसम बदलने के साथ शरीर को एडजस्ट करने में कुछ वक्त लगता है. इस दौरान हम अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को वक्ती तौर पर कमजोर पाते हैं. हालांकि इस मौसम में आम सर्दी और फ्लू सबसे ज्यादा होता है, लेकिन एक और बीमारी है, जो बड़ी आबादी को प्रभावित करती है, वह है साइनोसाइटिस. ऐसे में वायु प्रदूषण के साथ मरीज के लिए सांस लेना भी लगभग नामुमकिन हो जाता है.

साइनोसाइटिस क्या है?

साइनोसाइटिस को समझने के लिए, हमें पहले साइनस को समझने की जरूरत है. साइनस हमारी खोपड़ी के विभिन्न हिस्सों में मौजूद कैविटीज (खोखले छेद) होते हैं- गाल की हड्डियों, नाक के दोनों ओर, दोनों आंखों के बीच और माथे में. साइनस एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और आमतौर पर हवा से भरे होते हैं. साइनस एक श्लेष्म झिल्ली (म्यूकस मेंबरांस) से जुड़े होते हैं, जो हवा में गंदगी या अन्य कणों को रोककर साइनस को साफ रखती हैं.

साइनोसाइटिस के कई कारण हैं
साइनोसाइटिस के कई कारण हैं
(फोटो: iStock)

जब साइनस तरल पदार्थ से ब्लॉक हो जाते हैं, तो इसकी लाइनिंग (अस्तर) में सूजन आ सकती है और इससे बैक्टीरिया अंदर आ सकते हैं, जो संक्रमण का कारण बनते हैं, जिसे हम साइनोसाइटिस कहते हैं. इससे म्यूकस बन सकता है (नाक बहना), जिससे दर्द और बेचैनी के साथ सांस लेने में मुश्किल हो सकती है.

साइनोसाइटिस के कई कारण हैं, जैसे:

  • सामान्य जुकाम
  • एलर्जी
  • एयर प्रेशर में बदलाव
  • एलर्जिक राइनाइटिस, नाक के अस्तर की सूजन
  • नाक के अंदरूनी हिस्से में नोजल पॉलिप्स या छोटी गैर-कैंसरकारक गांठ बनना
  • नाक में संरचनात्मक विकृतियां जैसे कि टेढ़ा सेप्टम या टरबाइन हाइपरट्रॉफी

शिशुओं में, पैसिफायर के उपयोग या पीठ के बल लेट कर बोतल से दूध पीने से भी साइनोसाइटिस हो सकता है.

साइनोसाइटिस की पहचान ज्यादातर उन जगहों में दर्द या संवेदना से होती है, जहां साइनस मौजूद होता है, जैसे कि गाल, आंखों के चारों ओर, नाक के किनारों पर.

यह तेज सिरदर्द के रूप में भी सामने आ सकता है. नीचे झुकने पर दर्द बढ़ता है. सामान्य लक्षणों में कफ, बुखार, सांस में बदबू या थकान भी शामिल है.

अधिक विशिष्ट लक्षण नाक में रुकावट, खर्राटे, गंध का अहसास नहीं होना, नाक से हरे बहाव या श्लेष्म (बहती नाक) को गले में नीचे जाता महसूस करना.

1. नेजल इरिगेशन

सेलाइन सॉल्यूशन के जरिए नाक को साफ और मौजूद म्यूकस को पतला किया जाता है
सेलाइन सॉल्यूशन के जरिए नाक को साफ और मौजूद म्यूकस को पतला किया जाता है
(फोटो: iStockphoto)

साइनोसाइटिस के लिए सबसे अधिक मान्य उपचारों में से एक है नेजल इरिगेशन, जिसे सेलाइन वाश भी कहा जाता है. इसमें सेलाइन सॉल्यूशन के जरिए नाक को साफ और मौजूद म्यूकस को पतला किया जाता है, ताकि वो आसानी से बाहर निकल सके. ये या तो स्प्रे बॉटल या नेति पॉट की मदद से करते हैं.

1/2 कप स्टेराइल या आसुत पानी ( डिस्टिल्ड वॉटर), 1/2 चम्मच नमक और एक चुटकी बेकिंग सोडा को मिलाकर एक घोल बनाएं. इसे एक स्क्वीज बॉटल में डालें. अपने सिर को एक तरफ झुकाएं और कुछ बूंदों को नाक के एक तरफ में स्प्रे कर दें और इसे दूसरे से बहने दें. यही क्रिया दूसरी तरफ भी दोहराएं.

अगर नेति पॉट का इस्तेमाल करते हैं, तो इसे स्टेराइल या आसुत पानी से भरें और एक टब या सिंक के ऊपर सिर को एक तरफ झुकाएं. पॉट की टोंटी को ऊपर की तरफ नाक में डालें और पानी गिराएं. इसे दूसरी नाक से बाहर निकलने दें. इस प्रक्रिया के दौरान मुंह से सांस लें.

संक्रमण के खतरे से बचने के लिए स्टेराइल या आसुत पानी का इस्तेमाल जरूरी है. उबालकर ठंडा किए गए नल के पानी से भी काम चल सकता है.

2. भाप लेना

भाप दुनिया के कई हिस्सों में सभी किस्म के कफ और सर्दी का इलाज करने के लिए एक लोकप्रिय घरेलू नुस्खा है. भाप बंद नाक को खोलने में मदद करती है और जमे हुए म्यूकस को ढीला करती है.

ऐसा करने का एक तरीका हॉट शावर में बैठना और भाप को अवशोषित करना है. भाप को सांस के रास्ते अंदर लेने का एक और अधिक सीधा तरीका है वेपोराइजर का इस्तेमाल करना या खौले हुए पानी से भाप को अंदर लेने के लिए सिर को तौलिये से ढकना. इस दौरान जलने से बचने के लिए सतर्क रहें. पानी में पिपरमिंट, यूकेलिप्टस या रोज मैरी एसिंशियल ऑयल की कुछ बूंदें डाल देने से भाप के असर में और सुधार हो सकता है.

3. एलर्जी से बचाव

सफाई और डस्टिंग से नाक की एलर्जी और साइनोसाइटिस से बचने में मदद मिल सकती है
सफाई और डस्टिंग से नाक की एलर्जी और साइनोसाइटिस से बचने में मदद मिल सकती है
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साइनोसाइटिस इंफेक्शन एलर्जी से भी काफी हद तक जुड़ा हुआ है, ऐसे में एलर्जी से बचाव करना साइनस के संक्रमण की संभावनाओं को कम करने का एक प्रभावी तरीका साबित हो सकता है. एयर फिल्टरों को साफ रखना, फर्निशिंग को साफ रखना, धूल कणों की सफाई करना, पालतू जानवरों को दूर रखना और नियमित रूप से सफाई और डस्टिंग से नाक की एलर्जी और साइनोसाइटिस से बचने में मदद मिल सकती है.

अगर लगातार साइनस संक्रमण रहता है, तो ऐसे गद्दे, तकिए और अन्य सामान खरीदना बेहतर होगा जिसमें एंटी-एलर्जी गुण होते हैं. भारी कालीन और पर्दो से बचें, जिनमें धूल जमने की संभावना ज्यादा होती है.

4. वार्म और कोल्ड कंप्रेस

वार्म और कोल्ड कंप्रेस के कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं और ये साइनोसाइटिस में भी काम करते हैं. बारी-बारी से वार्म और कोल्ड कंप्रेस लेने से बेहतर नतीजे मिलते हैं. ये जमे म्यूकस को ढीला करके बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे नाक की सफाई होती है और इससे जुड़ा दर्द भी कम होता है.

इसे सही तरीके से करने के लिए, एक आरामदायक स्थिति में लेट जाएं और माथे, गाल व नाक पर गर्म छोटा तौलिया रखें. इसे तीन मिनट के लिए छोड़ दें और फिर इसकी जगह लगभग 30 सेकंड के लिए कोल्ड कंप्रेस करें. इस प्रक्रिया को दिन में छह दफा दो-तीन बार दोहराएं.

5. हाइड्रेशन

शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी जरूरी है
शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी जरूरी है
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साइनस के भीतर म्यूकस (श्लेष्म) झिल्ली को नम रखने में मदद के लिए उचित हाइड्रेशन महत्वपूर्ण है. शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी ड्राइनेस से निपटने में मदद करता है और तेजी से ठीक होने में मदद करता है. साइनस संक्रमण से निपटने के लिए सबसे अच्छा उपाय गर्म पानी, ताजे फल के रस या हर्बल चाय हैं. बहुत ज्यादा चाय और कॉफी या अन्य कैफीनयुक्त पेय से डिहाइड्रेशन हो सकता है. यूरीन के रंग पर नजर रखें- साफ रंग बताता है कि आप पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ ले रहे हैं.

कोल्ड ड्रिंक या फ्रोजेन फूड्स से बचें क्योंकि ये साइनोसाइटिस के लक्षणों को और बिगाड़ सकते हैं.

6. चिकन सूप

चिकन सूप हमारे शरीर और आत्मा को तृप्त करने के लिए मशहूर है और यह साइनोसाइटिस के मामले में भी अच्छा काम करता है. माना जाता है कि चिकन सूप में एंटी-इनफ्लेमेंटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो ठंड, नाक जमने और साइनोसाइटिस से जुड़ी अन्य समस्याओं के मामले में काफी राहत प्रदान करता है. सूप में लहसुन और हल्दी जैसे चिकित्सीय मसालों को मिला देने से इसका असर बढ़ सकता है.

7. हल्दी अदरक शहद की चाय

2 कप पानी उबालें और उसमें एक बड़ा चम्मच कसा हुआ अदरक व 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं.
2 कप पानी उबालें और उसमें एक बड़ा चम्मच कसा हुआ अदरक व 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं.
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साइनोसाइटिस को एक खुराक में ठीक कर देने वाला उपाय मसालेदार ‘चाय’ है, जो दुकानों पर मिलने वाली किसी भी दवा से ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है. हल्दी, अदरक और शहद इन तीनों में एंटी-इनफ्लेमेंटरी गुण होता है, जो संक्रमण से लड़ने और उपचार प्रक्रिया को तेज करने में मदद करता है.

2 कप पानी उबालें और एक बड़ा चम्मच कसा हुआ अदरक और 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं. पांच मिनट उबालें और फिर चूल्हा बुझा दें. इसे छान लें और इसमें एक चम्मच शहद मिला लें. इसे दिन में कई बार हिलाकर पीएं. चाहें तो हल्दी के साथ थोड़ा दालचीनी पाउडर भी मिला सकते हैं.

इन सभी के साथ, अच्छी तरह आराम करने और पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी जाती है. तनाव और कम नींद भी ऐसे कारक हैं, जो साइनोसाइटिस सहित किसी भी बीमारी को बढ़ाते हैं. इसलिए पूरी तरह से ठीक होने के लिए कुछ समय आराम के लिए निकालें. जैसे-जैसे मौसम बदलता है, खुद को भला-चंगा रखने के लिए कुछ आसान उपाय करने में ही समझदारी है, जैसे कि कई बार हाथ धोना और सर्दी या अन्य संक्रमण वाले लोगों से बचना.

अपनी डाइट पर ध्यान दें. ऑयली और फैटी फूड आइटम न खाएं. ज्यादातर साइनोसाइटिस संक्रमण कुछ हफ्तों में ठीक हो जाते हैं, हालांकि एलर्जी-जनित साइनोसाइटिस दोबारा उभर सकता है. वैसे, तकलीफ अगर एक हफ्ते से ज्यादा समय तक रहती है, या आपको बुखार है या लगातार नाक बहती है, तो सलाह दी जाती है कि डॉक्टर को दिखा लें.

(प्रतिभा पाल ने अपना बचपन ऐसी शानदार जगहों में बिताया है, जिनके बारे में सिर्फ फौजियों के बच्चों ने ही सुना होगा. वह तरह-तरह की किताबों को पढ़ते हुए बड़ी हुई हैं. जब वो अपने पाठकों के साथ शेयर करने के लिये किसी DIY रेसिपी तैयार करने का काम नहीं कर रही होती हैं, तब प्रतिभा सोशल मीडिया पर अपनी लिखने की कला का जादू बिखेर रही होती हैं. आप www.pratsmusings.com पर उनके ब्लॉग पढ़ सकते हैं या @myepica पर ट्विटर पर संपर्क कर सकते हैं.)

ये स्टोरी सिर्फ आपको जानकारी देने के लिए है, फिट हिंदी बिना डॉक्टर या स्पेशलिस्ट की सलाह लिए किसी भी उपाय को अपनाने का सुझाव नहीं देता.

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